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अमिताभ जी की नजर में नाट्ककार डा. चरणदास सिंद्धू जी।

किसी भी व्यक्ति को उसकी किताब से पूरा-पूरा नहीं जाना जा सकता। वैसे भी किसी व्यक्ति को पूरा कब जाना जा सका है, हां उसके करीब रह कर उसकी प्रकृति, उसका स्वभाव, उसकी आदतें आदि जानी जा सकती है और जब ऐसे व्यक्ति किसी के बारे कुछ लिखते हैं तो हम उक्त व्यक्ति के
 
सुशील कुमार छौक्कर
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अमिताभ जी और सुशील की जुगलबंदी की मुम्बई

ये मुम्बई हैं मेरे यार  देख रहा हूँ रेल की पटरियों पर तारकोल की सड़को पर लोगों को भागते-दोड़ते हुए। हवा गाती नहीं इनकी साँसों में हँसी नाचती नहीं इनके चेहरों पर। रेल में बैठी लड़की की लटे हवा में लहरा रही आँखे उसकी नींद की थाप पर झपक-झपक जा रही।
 
सुशील कुमार छौक्कर