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अमर सिंह की पीड़ा

सपाई और उनके मुखिया मेरे नहीं हुए तो किसके होंगे?इन दिनों अमर सिंह अपने व्लॉग पर समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव का कच्चा-चीट्ठा खोलने में लगे हुए है. उन्होंने अपने ताजातरिन पोस्ट में मुलायम सिंह पर फिर से निशाना साधा है. नीचे अमर सिंह के इस पोस्ट को
 
bhojpuriyababukahin
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अमर-मुलायम वाक्युद्ध शिखर पर बेपेन्दी के लोटे

अमर मुलायम वाक्युद्धराजनीति के शिखर पर बेपेंदी के लोटेवीरेन्द्र जैनअपने फिल्मी स्तम्भ में अमर सिंह के बारे में चर्चा करते हुये प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक जय प्रकाश चौकसे ने तर्क दिया था कि -- -इस फिल्मी स्तम्भ में अमर सिंह के बारे में लिखना इसलिये उचित है
 
वीरेन्द्र जैन
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...ताकि न बने दूसरा अमर सिंह

सबसे पहले तो मैं ये बता दूं कि मैं राजनीति पर नहीं लिखता। इसके कई कारण हैं पर यहां कुछ एक का जिक्र कर दूं ताकि स्पष्ट हो जाए। पहली बात तो ये कि मैं जहां का निवासी हूं यानी उत्तर प्रदेश का वहां का एक बच्चा भी राजनीति और कि्रकेट पर राय दे सकता है। यहां
 
pankaj mishra
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अमर का नया ठौर

सपा से निकाले गए अमर सिंह को लेकर कई राजनीतिक दलों के दरवाजे खोले गए थे। राकांपा, बसपा, भाजपा, कांग्रेस की भी चर्चा थी, लेकिन फौरी तौर पर 'लोकमंचÓ की घोषणा कर कयासों पर विराम लगाया। कल तक जो पार्टी के हरेक निर्णय के सूत्रधार होते थे, उन्हें अब कोई
 
सुभाष चन्द्र
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सच या मज़ाक -अमर सिंह का इस्तीफ़ा स्वीकार मुलायम सिंह पहुचे सडक पर

कमाल है कमाल है क्रिया की प्रतिक्रिया इतनी तेज़ हो सकती है इसी बात का तो कमाल है . आज दो खबरे अखबार  में छापी गई दोनों को साथ जोड़ कर पढ़े तो उसका जो अर्थ निकला वही कमाल है . खबर नम्बर १ - अमर सिंह का इस्तीफ़ा स्वीकार      
 
dhiru singh {धीरू सिंह}
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अमर मुलायम प्रसंग.........और ब्लेकमेलिंग किसे कहते हैं?

अमर-मुलायम प्रसंग्.........और ब्लेकमेलिंग किसे कहते हैं?[बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी]वीरेन्द्र जैनएक बोध कथा याद आ रही है।जिस गाँव में नसरुद्दीन रहता था उस गाँव में एक गरीब आदमी की शादी तय हुयी। जिस दर्ज़ी को उसने पाज़ामा सिलने को दिया था वह बीमार पड़
 
वीरेन्द्र जैन
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कहीं इतिहास फिर ना दोहराया जाए -मुलायम की अमर कथा

..बहुत पहले उत्तर प्रदेश में एक किस्सा मशहूर था कि सपा का टिकट के लिए अपराधियों  को प्राथमिकता दी जाती थी . एक बार टिकिट के लिए इंटरव्यू हो रहा था . लाइन लगी थी समस्या यह थी टिकिट उसी को मिलेगा जो सबसे बड़ा हो . तभी एक आदमी आया और उसने कहा मैं जब तक
 
dhiru singh {धीरू सिंह}