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एक कविता....

दोस्तों कल एक कविता सुनाने का मौका मिला ...आपके सामने प्रस्तुत है... आज़ादी की होली पहन वसन्ती चोला निकली मस्तानो की टोली आजादी की खातिर खेली दिवानों ने होली आज सजा है सर पे उनके बलिदानो का सेहरा चाँद सितारों से मिलता है नादानों का चेहरा आँख में आँसू
 
सुनीता शानू