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महात्माओं का चरित्र भिन्न होता है - चाणक्य

महात्माओं का चरित्र भिन्न होता है, वे धन-दौलत को तिनके के समान समझते हैं किन्तु इसके प्राप्त हो जाने पर बोझ से झुक जाते हैं - चाणक्य www.albelakhatri.com