लोकतंत्र
अमर गम्भीर गाड़ी तेज रफ्तार से मंजिल की ओर बढ़ रही थी। डिब्बे में बैठी सवारियां अपनी बातों में मस्त थीं। “मेरा दिल करता है, जंजीर खींचूं।” एक यात्री बोला। “क्यों?” “बस मन करता है।” उसने अपनी इच्छा प्रकट की। और फिर सबने मिल कर फैसला किया, “इसे जंजीर खींच
May 01 2010 08:16 AM



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