कल मानव की तैयारी(१४११)
है फिक्र किसकोहै फुरसत किसे कौन मिट गयाकौन मिट रहानहीं सरोकारकिसी बात सेसिवा खुद केहै चाहता कोई किसेहर आदमी बस जी रहास्वार्थ-निहित जिंदगीचाहता हर-पल यहीसब करें उसकी बंदगीकल मिटी इंसानियतआज बाघ की बारी हैमिट रहा आज बाघ तोकल मानव की तैयारी हैपर,फर्क क्या
Feb 26 2010 04:07 AM



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