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पसीने की धारा-हिन्दी व्यंग्य कवितायें

कभी मेरे बहते हुए पसीने पर तुम तरस न खाना, यह मेरे इरादे पूरे करने के लिये बह रहा है मीठे जल की तरह, इसकी बदबू तुम्हें तब सुगंध लगेगी जब मकसद समझ जाओगे। सिमट रहा है ज़माना वातानुकुलित कमरे में सूरज की तपती गर्मी से लड़ने पर जिंदगी थक कर आराम से सो जाती,
 
दीपक भारतदीप
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रहस्य-हिन्दी शायरी

दौलत, शौहरत और ताकत का नशा भले चंगे को रास्ते से भटका देता है, शिखर पर पहुंचे हैं जो दरियादिल उनसे जज़्बाती हमदर्दी का उम्मीद करना बेकार है, क्योंकि हो जाते हैं उनके सपने पूरे पर दर्द के अहसास मर जाते हैं। हाथ फैलायें खड़े हैं नीचे उनसे दया की आशा करने
 
दीपक भारतदीप
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कनाडा का दुस्साहस...

सीमा सुरक्षा बल पर कनाडा के उच्चायोग ने एक वीसा मामले में जो टिप्पणी की उसे हलके में नहीं लिया जा सकता है. यह सही है कि किसी को भी कुछ भी कहने का हक़ है पर जिस बल पर पूरे भारत को गर्व है उसके बारे में एक विदेशी उच्चायोग किस तरह से ऐसी बातें कर सकता है ?
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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हिन्‍दी ब्‍लॉगरों लड़ाई झगड़े छोड़ो : अपनी ताकत जमाने को दिखला दो - अभिव्‍यक्ति को अपनी साकार करो (अविनाश वाचस्‍पति)

जलजला कुमार और ढपोरशंख और बेनामी सरीखे हिन्‍दी ब्‍लॉगर-टिप्‍पणीकारों से विशेष आवाह्ल।कमल से लो सीख लो। वो खुद सिखलाने नहीं आएगा। आप उसकी जीवन प्रक्रिया को जानो, समझो और मंथन करो। जिस प्रकार कमल का फूल गंदे पानी के तालाब में रहकर भी पुष्पित होता है । जीवन
 
अविनाश वाचस्पति
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दूसरे की सोच पर चलकर-हिन्दी शायरी

हम खुली आंखों से सपने देखते रहें, हम अमन से जियें, जंग के दर्द दूसरे सहें, कोई करे वादा तो शिखर पर बिठा देते हैं वोट देकर। हम खूब कमाकर परिवार संभालें, दूसरे अपना घर उजाड़ कर, ज़माने को पालें, कोई दे पक्की गांरटी तो पीछा छुड़ाते हैं नोट देकर, शायद नहीं
 
दीपक भारतदीप
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सच के नाम पर सजा झूठ-हिन्दी शायरी

हिन्दी साहित्य,समाज,मनोरंजन,मस्ती,संदेश,hindi shaitya,sher,shतमाम रस्में निभाकर भी हम क्या पाते हैं, पुराने बयान पर आंखें बंद कर यकीन के साथ यूं ही जिंदगी में चले जाते हैं। इंसानों की सोच पर बंधन डाले हैं सर्वशक्तिमान के संदेश की किताबें लिखने वालों ने
 
दीपक भारतदीप
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विकासवादी और पुरातनवादी-हिन्दी कविता

स्त्री का भला करेंगे, बच्चों को खुश करने के दावें भरेंगे, वृद्धों का उद्धार करेंगे, मजदूरों को न्याय देंगे, गरीब को करेंगे अमीर, और लाचार का सहारा बनेंगे, ऐसे दावे धोखा है, बेईमानी का खोखा है। समाज को एक जैसा बनाने की कोशिश करने वाले विकासवादी अक्लमंद
 
दीपक भारतदीप
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इंसान सस्ता हो रहा है-क्षणिकायें

महंगाई आसमान पर चढ़ गयी है, इसलिये नैतिकता तस्वीर में जड़ गयी है। चीजों की तरह इंसान भी बिकने लगा है, मांग आपूर्ति के नियम से अनुसार जरूरत से ज्यादा है बाज़ार में इसलिये मेहनत की कीमत पड़ रही है। ——— आधुनिकता के नाम पर इंसान सस्ता हो रहा
 
दीपक भारतदीप
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ज़माने में जंग की आग लगाकर-हिन्दी शायरी

बंदूक के सहारे ज़माने में बदलाव लाने की कोशिश हथियारों के सौदागरों के दलाल की चाल लगती है, खून बहाकर तरक्की के रास्ते चलने का ख्याल डाकुओं जैसा लगता है, दुनियां के जिंदा रहने के लिये कुछ मूर्तियों का टूटना जरूरी है शैतानों का ख्याल लगता है दरअसल जिनकी रूह
 
दीपक भारतदीप
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चमन में अमन है-हिन्दी व्यंग्य कविता

दहशतगर्द घूम रहे आजाद उनकी गोलियों से सभी तो नहीं मर गये फिर भी जिंदा हैं ढेर सारे लोग इसलिये मान लो चमन में अमन है। खेल के नाम पर चल रहा जुआ जिनकी मर्जी है वही तो खेल रहे हैं बाकी लोग तो बैठे हैं चैन से इसलिये मान लो चमन में अमन है। [...]
 
दीपक भारतदीप
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हिन्दू धर्म संदेश-नीच स्वभाव होने पर ऊंचे कुल का सम्मान नहीं मिलता

य ईर्षुः परवित्तेषु रूपे वीर्य कुलान्वये। सुखभौभाग्यसत्कारे तस्य व्याधिनन्तकः।। हिंदी में भावार्थ-जो दूसरे का धन, सौंदर्य, शक्ति और प्रतिष्ठा से ईर्ष्या करता है उसकी व्याधि की कोई औषधि नहीं है। न कुलं वृत्तही प्रमाणमिति मे मतिः। अन्तेध्वपि हि जातानां
 
दीपक भारतदीप
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असली और नकली जांबाज-हिन्दी शायरी

मैदान पर लड़ते कम किनारे पर खड़े दिखाते दम कागजी जांबाजो के करतब कभी अंजाम पर नहीं पहुंचे पर हर पल उनको अपनी आस्तीने ऊपर करते हमने देखा है। कीर्तिमान बहुत सुनते हैं उनके पर कामयाबी के नाम पर खाली लेखा है। ———- पत्र प्रारूप पर हाशिए पर नाम
 
दीपक भारतदीप
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कामयाबी और खौफ-हिन्दी शायरी

अपनी कामयाबी भी उनको तब तक हज़म नहीं हो पाती है, जब तक दूसरे की नाकामी की खबर उनके पास न आती है। दुनियां का यही दस्तूर है मूर्खों का भी क्या कसूर है सभी लोगों दूसरे की छोटी लकीर से बड़ी लकीर खींचना नहीं आती है। ——— हर रोज वह कामयाबी के
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नैतिकता की बात-हिन्दी व्यंग्य कविता

आपस में जाम टकराते हुए लोग नैतिकता की बात करने लग जाते हैं, फिर सुनाते हैं अपनी कमाई के नुस्खे जैसे दो नंबर की कमाई एक नंबर की हो सीना फुलाकर उसकी कहानी सुनाते है।। बहुत अच्छा लगता है आदर्श और नैतिकता की बात करते हुए बशर्त है आदमी स्वयं से छिप सकता
 
दीपक भारतदीप
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सर्वशक्तिमान और शैतान-हिन्दी हास्य व्यंग्य कथा

सर्वशक्तिमान को यह अहसास होने लगा था कि संसार में उनका नाम स्मरण कम होता जा रहा था। दरअसल अदृश्य सर्वशक्तिमान सारे संसार पर अनूभूति से ही नियंत्रण करते रहे थे और लोगों की आवाज तभी उन तक पहुंचती थी जब उनके हृदय से निकली हो। अपनी अनुभूति के परीक्षण के लिये
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संत कबीर के दोहे-जहां विवाद होते हों, वहां न जायें

कबीर न तहां न जाइये, जहां जु नाना भाव। लागे ही फल ढहि पड़े, वाजै कोई कुबाव।। संत शिरोमणि कबीरदास का कहना है कि वह कभी न जायें जहां नाना प्रकार के भाव हों। ऐसे लोगों से संपर्क न कर रखें जिनका कोई एक मत नहीं है। उनके संपर्क से के दुष्प्रभाव से हवा के एक
 
दीपक भारतदीप
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महिला आरक्षण विधेयक...

आज देश महिला दिवस पर एक ऐसा काम करने जा रहा है जिसकी बहुत दिनों से प्रतीक्षा थी. वैसे तो महिला सशक्तिकरण में देश में बहुत सारे कदम लगातार उठाये जाते रहे हैं पर इस महिला आरक्षण विधेयक के बाद संसद की सूरत बदली नज़र आएगी. आज अगर यह विधयक पास होने के निकट है
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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तोहफों के जाल में प्यार-हिन्दी व्यंग्य कविता (love and gift-hinci satire poem)

अब प्यार जताने का सिलसिला तोहफों से चलने लगा है, इसलिये आदमी तोहफे देकर हर इंसान प्यार खरीदने लगा है। तोहफों की कीमत जितनी बढ़ेगी, प्यार की ऊंचाई भी उतनी लगेगी, नजरों का दोष है कि दिल का प्यार जाहिर करने की ख्वाहिशों के आगे हर तोहफा सस्ता लगने लगा है, मगर
 
दीपक भारतदीप
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नर्तकों के देवता होने का वहम-हिन्दी क्षणिकाऐं

विदुषकों के विद्वान और नर्तकों के देवता होने का वहम पूरे ज़माने को हो गया है, झूठ के सहारे खड़ा है दौलत का महल, इज्जत पाने के लिये, होने लगी सौदे की पहल, ईमान सभी का सो गया है। ———– सर्वशक्तिमान ने दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का
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चाणक्य नीति शास्त्र-हृदय में शुद्धता में निहित है धर्म का भाव

वाचः शौचं च मनसः शौचन्द्रियनिग्रहः। सर्वभूति दया शौचं एतच्छौत्रं पराऽर्थिनाम्।। हिंदी में भावार्थ-वाणी की पवित्रता, मन की स्वच्छता, इंन्द्रियों पर नियंत्रण, समस्त जीवों पर दया और भौतिक साधनों की शुद्धता ही वास्तव में धर्म है। पुष्पे गंधं तिले तैलं
 
दीपक भारतदीप
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छोटे और बड़े साहब-हिन्दी क्षणिकाएँ (boss culture-hindi comic poem)

 दिन भर अपने लिए साहब शब्द सुनकर वह रोज फूल जाते हैं। मगर उनके ऊपर भी साहब हैं जिनकी झिड़की पर वह झूल जाते हैं। ——————– नयी दुनियां में पुजने का रोग सभी के सिर पर चढ़ा है। कामयाबी का खिताब नीचे से ऊपर जाता
 
दीपक भारतदीप
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धर्म और अवतार-हिंदी हास्य कविता

फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के एक नये अवतार से मिलायें। हमारे दोस्त का आयोजन है इसलिये मिलेगा हमें भक्तों में खास दर्जा, दर्शन कर लो, उतारें सर्वशक्तिमान का इस जीवन को देने का
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जो किसी की नाक से टकराकर खत्म हो जाये

अंग्रेजी भाषा में एक कहावत है - 'Your freedom stops where the tip of my nose starts.' मतलब तो इसका होता है कि स्वतंत्रता का इस्तेमाल किसी और की कीमत पर नहीं किया जा सकता, लेकिन कुछ लोगों ने इसका मतलब समझते हैं कि हम चाहे जहां नाक घुसेड़ दें, वहीं सबका
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क्रिकेट खेल के साथ दूसरी बातें भी जुड़ी हैं-हिन्दी आलेख

भारत में चलने वाली एक क्लब स्तरीय प्रतियोगिता में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नीलामी में किसी ने नहीं खरीदा तो दोनों देशों में हो हल्ला मच गया है। किसी मनुष्य की नीलामी! बहुत आश्चर्य हो रहा है! यह तो गनीमत है कि इस देश में अधिकतर संख्या अभी भी अशिक्षित और
 
दीपक भारतदीप
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कौटिल्य दर्शन-अपनी गलत आदतों की उपेक्षा न करें

प्रकृतिव्यवसननि भूतिकामः समुपेक्षेत नहि प्रमाददर्पात्। प्रकृत्तिवयवसनान्यूपेक्षते यो न चिरात्तं रिपवःपराभवन्ति।। हिंदी में भावार्थ-विभूति की इच्छा से उत्पन्न प्रमाद या अहंकार की प्रकृत्ति से उत्पन्न व्यसनों की उपेक्षा न करें। प्रकृत्ति के व्यसनों की
 
दीपक भारतदीप
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धमाके के बाद

शनिवार दिल्ली के लिए सबसे काला दिन बनता जा रहा है। धमाका पर धमाका हो रहा है। लोग कितने डरे है, इसके बचने का उपाय सोचकर रेलिंग पर बैठ गए की मौका मिलते ही कूद जायेंगे, लोगो को बचने के लिए, माँ खड़ी है शायद हौसला बढ़ाने के एक ये तस्बीर है प्यारे दूरदर्शन
 
दीपक राजा
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सुख का किश्तों पर मिलना-हास्य कविताएँ (sukh kishton men-hasya kavitaen)

आंधी चलकर फिर रुक जाती है धरती हिलती नहीं भले कांपती नजर आती है। मौसम रोज बदलते हैं उससे तेज भागते हैं, आदमी के इरादे पर सांसें उसकी भी कभी न कभी उखड़ जाती हैं फिर भी जिंदगी वहीं खड़ी रहती है भले अपना घर और दरवाजे बदलती जाती
 
दीपक भारतदीप