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विवाह प्रथा की ऐसी की तैसी !

न्यायालय की उक्त टिप्पणी एक ऐसे समय पर आई है जब हमारा युवा समाज तमाम सामाजिक मान्यताओं को ध्वस्त करते हुये कुछ भी करने को बेताब दिखाई दे रहा है। ऐसे में इस प्रकार की टिप्पणी आग में घी डालने जैसी ही साबित होगी।
 
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न्यायालय की उक्त टिप्पणी एक ऐसे समय पर आई है जब हमारा युवा समाज तमाम सामाजिक मान्यताओं को ध्वस्त करते हुये कुछ भी करने को बेताब दिखाई दे रहा है। ऐसे में इस प्रकार की टिप्पणी आग में घी डालने जैसी ही साबित होगी।
 
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