हिंदी की व्यथा
हिंदी की व्यथासंवेदना की परागरज ले ककहरे ने गर्भ धरा थाशब्दों के भ्रूण पनपेतो, भाषा ने खोला नयन था आशा की ओढ़ चुनरी हिंदी का हुआ आगमन था हास,परिहास, कथा,कविता, लोरी से भरा बचपन था बन गई उपन्यास, ग़ज़ल, रुबाईआ गया भरपूर यौवन था आंचल में भर के सोलह
Feb 07 2010 11:26 AM



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