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प्रकृति की ओर एक कदम..

आज विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) है. क्या वाकई इस दिवस का कोई मतलब है. लम्बे-लम्बे भाषण-सेमिनार, कार्डबोर्ड पर स्लोगन लेकर चलते बच्चे, पौधारोपण के कुछ सरकारी कार्यक्रम...क्या यही पर्यावरण दिवस है ? क्या इतने मात्र से पर्यावरण शुद्ध हो जायेगा. जब हम
 
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Brain-Drain is Better than Brain-in-Drain

  मेरी पिछली पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए खुशदीप सहगल जी ने इन शब्दों को उद्धरित किया था। द इकोनॉमिस्ट अखबार में १० सितम्बर २००५ को छपी एक सर्वे रिपोर्ट का शीर्षक था- Higher Education, Wandering Scholars. इस अखबार ने सर्वे रिपोर्ट में भारत के पूर्व
 
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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अब तो बस करिए ज्ञान जी…

  रात को सवा दस बजे सोफ़े पर लेटकर जी-टीवी पर १२/२४ करोल बाग के काण्ड देख रहा था। लेटकर ब्लॉगरी नहीं कर सकता इसलिए शाम को एक घण्टा इसी प्रकार टीवी देखना अच्छा लगता है। ऑफिस और गृहस्थी के कामों की थकान मिटा ही रहा था कि फोन पर सूचना मिली कि ज्ञानजी के
 
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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प्रगतिशील सोच के अन्तर्विरोधों के बीच कविता

कविता आत्मा का मौलिक व विशिष्ट संगीत है, जो मानव में संस्कार रोपती हैै। एक ऐसा संस्कार जो सभी को प्रदत्त है पर जरूरत है उसके खोजे जाने, महसूस करने और गढ़ने की। यही कारण है कि सम्वेदनाओं का प्रस्फुटन होते ही कविता स्वतः फूट पड़ती है। जब मानव हृदय में विचार
 
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ब्लागिंग का 'जलजला'...जरा सोचिये !!

आजकल ब्लागिंग में भी टी.आर.पी. के चक्कर में सबसे बड़ा कौन की होड़ लगी/ लगाई हुई है. लोग रात को टी. वी. देखते हैं और अल-सुबह ही लैपटाप पर बैठकर रातों-रात चर्चा में आने का बहाना ढूंढने लगते हैं. वैसे भी इस देश में लोगों को बांटना हो तो पुरस्कार और सम्मान
 
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परदुःखकातर… :(

  वैशाख की दुपहरी में सूर्य देवता आग बरसा रहे हैं… ऑफ़िस की बिजली बार-बार आ-जा रही है। जनरेटर से कूलर/ए.सी. नहीं चलता…। अपनी बूढ़ी उम्र पाकर खटर-खटर करता पंखा शोर अधिक करता है और हवा कम देता है। मन और शरीर में बेचैनी होती है…। कलेक्ट्रेट परिसर में ही
 
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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आनन्द दे रहा है मयंक का बुढापा , अंगूर के सारे मज़े किशमिश में आ गये हैं

अब कौन कितना और क्या लिखता और सोचता है यह तो मैंआंकलित नहीं कर सकता , लेकिन एक वर्ष हो गया मुझे भीब्लोगिंग में.........इसलिए मैं एक बात तो अनुभव के आधारपर ज़रूर कह सकता हूँ कि यदि कोई ब्लोगर सतत सेवा कररहा है और न केवल सेवा कर रहा है बल्कि मज़े ले ले कर
 
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निरुपमा के बाद रजनी को भी जान गँवानी पड़ी… क्यों???

  निरुपमा पाठक की मौत का मामला अभी अखबारी सुर्खियों से हटा भी नहीं था कि इलाहाबाद  में ऐसे ही क्रूर कथानक की पुनरावृत्ति हो गयी। इस बार किसी सन्देह या अनुमान की गुन्जाइश भी नहीं है। पुलिस को घटनास्थल पर मिले सबूतों के अनुसार परिवार वालों ने
 
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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ईव-टीजिंग और ड्रेस कोड

अपनी नजाकत और नफासत के लिए मशहूर लखनऊ में पिछले दिनों एक बात हुई. इससे पहले कि बात दूर तलक तक जाती, उसे संभल लिया गया पर इस बात ने एक बार फिर से समाज के सामने तमाम सवाल खड़े कर दिए.जिलाधिकारी, लखनऊ ने राजधानी के छात्र-छात्राओं को स्कूल/कालेज यूनीफार्मा
 
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मदर्स डे पर : माँ की याद में

आज सुबह कुछ पहले ही नींद खुल गई. मन किया कि बाहर जाकर बैठूं. अभी सूर्य देवता ने दर्शन नहीं दिए थे पर ढेर सारी चिड़िया कलरव कर रही थीं. मौसम में हलकी सी ठण्ड थी, शायद रात में बारिश हुई थी. अचानक दिमाग में ख्याल आया कि हम लोग भी घर से कितने दूर हैं. एक ऐसी
 
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60 साल में मात्र 4 महिला जज ??

...चार साल के लम्बे इंतजार के बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट को एक अदद महिला न्यायधीश मिल ही गई. सुनकर बड़ा ताज्जुब लगता है कि इस देश कि आधी आबादी महिलाओं की है, पर देश की सबसे बड़ी न्यायपालिका में उनका प्रतिनिधित्व ही नहीं है. एक तरफ हम महिलाओं के प्रति
 
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..फिर से बचपन के ख्यालों में

कई बार हमें छोटी-छोटी बातें सुकून देती हैं. हम फिर से बचपन में लौटना चाहते हैं. पर क्या करें बड़े होने के आदी जो हो गए हैं. पर शरीर बड़ा होने से क्या हुआ, मन तो अभी भी मानो बचपन की दहलीज पर है. हम बातें जरुर बड़ी-बड़ी करते हैं, पर कई बार हमारी बातों में
 
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बाल विवाह की भयंकरता समृद्ध राज्यों में भी

आजकल कलर्स चैनल पर चल रहा धारावाहिक 'बालिका वधू' काफी चर्चा में है. पश्चिम बंगाल में तो एक नाबालिग लड़की ने यह कहते हुए शादी से इंकार कर दिया कि बालिका वधु की आनंदी बाल विवाह का विरोध करती है। वस्तुत: बाल विवाह एक ऐसा मुद्दा है, जिसके प्रति हर कोई सचेत
 
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इधर उधर की

इधर उधर कीसोचा था अमेरिका जा कर रोज़ पोस्ट लिखा करूँगी, रोज़नामचे की तरह मगर कुछ दिन तो जेट लैग की वजह से नही लिख पाई फिर एक दो दिन घूमने चले गये और अब फ्लू ने घेर लिया। यहाँ फ्लू इतना भयानक फैला हुया है कि एक बार पकड ले तो छोडने का नाम नही लेता ।भारत की
 
निर्मला कपिला
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सुप्रीम कोर्ट में भी महिलाओं के लिए आरक्षण

लोकसभा-विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रयास बाद क्या न्यायपालिका में भी महिलाओं के लिए आरक्षण की जरुरत है. ऐसा तब सोचने की जरुरत पड़ती है, जब 29 जजों वाले सुप्रीम कोर्ट में एक भी महिला जज नहीं दिखती है. अभी तक सुप्रीम कोर्ट में 03 ही महिला जज
 
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भूकम्प का पहला अनुभव

भूकम्प का नाम सुना था और खूब पढ़ा भी था, पर कल पहली बार महसूस किया. अंडमान में कल रात्रि 10:27 बजे करीब डेढ़ मिनट भूकंप के झटके महसूस हुए. इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर पोर्टब्लेयर में 6.3 और मायाबंदर में 6.9 आंकी गई. जब भूकंप आया तो उस समय अधिकतर भाग में
 
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navi ram chalisa लेखकीय

संसार का दाता प्रत्येक जीवात्मा को उसके प्रारब्धानुसार कुछ ना कुछ ऐसा अवश्य देता है जो अन्य की तुलना में निसंदेह कुछ हद तक अतिविशिश्ट होता है। न जाने यह मेरे किस जन्म की भक्ति का प्रारब्ध है कि मां वीणा-पाणि ने अपने छलकते हुुए काव्य-कलश की एक नन्ही सी
 
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'पानी' को 'काला-पानी' होने से बचाएं

अंडमान में आजकल पानी की किल्लत जोरों पर है. चारों तरफ पानी ही पानी, पर पीने को एक बूंद नहीं, यह कहावत यहाँ भली-भांति चरितार्थ होती है. सुनामी के बाद यहाँ मौसम पहले जैसा नहीं रहा, अभी से जबरदस्त गर्मी का असर दिखने लगा है. जहाँ बारिश आम बात होती थी, वहीँ
 
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कंक्रीटों के शहर में गौरैया (विश्व गौरैया दिवस पर)

गौरैया भला किसे नहीं भाती. कहते हैं कि लोग जहाँ भी घर बनाते हैं देर सबेर गौरैया के जोड़े वहाँ रहने पहुँच ही जाते हैं। पर यही गौरैया अब खतरे में है. पिछले कई सालों से इसके विलुप्त होने की बात कही जा रही है. कंक्रीटों के शहर में गौरैया कहाँ घर बनाये, उस पर
 
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हिन्दी की तलाश जारी है...

एक तरफ हिंदी को बढ़ावा देने की लम्बी-लम्बी बातें, उस पर से भारत सरकार के बजट में हिंदी के मद में जबरदस्त कटौती. केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2010-11 के बजट में हिन्दी के लिए आवंटित राशि में पिछले वर्ष की तुलना में दो करोड़ रुपये की कटौती कर दी है। वित्त वर्ष
 
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धोळा में धूळो

धोळा,कुदरती हाथां उं दियो थको वो सर्टिफिकेट हे जिने ईं दुनियां को कोई भी मनक राजी मन उं कदै लेबो न छावे ,पण जीमणा में खास ब्याईजी-ब्याणजी की खास मनवार के न्यान सबने न-न करर्ता इंने हंसतो-हंसतो लेणाईज पड़े। भारतीय समाज की कतरी पीढ़ियां निकळगी होचबा को तरीको
 
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हिन्दी विश्वविद्यालय में तानाशाही का जिम्मेदार कौन

हिन्दी विश्वविद्यालय में छात्रों पर हो रहा अत्याचार निरन्तर जारी है जिसका जिम्मेदार कौन है यह पूरे घटनाक्रम को समझने पर पता लगाया जा सकता है. आखिर एक बनते हुए विश्वविद्यालय में निरन्तर चल रही तानाशाही पर कौन लगाम लगायेगा.मीडिया विभाग के एक छात्र अनिल को
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औरत का सम्मान करो----

औरत का सम्मान करो , औरत संसार की ज्योती है ।जिसने हम सबको जन्म दिया , वो जननी औरत होती है ॥जो करती भाईदूज के दिन , भाई के माथे पर टीका ।राखी के दिन राखी बांधे , वो बहना औरत होती है ॥औरत का सम्मान करो , औरत संसार की ज्योती है ॥उसके बिन सभी अधूरा है ,
 
अजय कुमार
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नारी को निर्णय की शक्ति दें (महिला-दिवस पर विशेष)

महिला-दिवस सुनकर बड़ा अजीब लगता है. क्या हर दिन सिर्फ पुरुषों का है, महिलाओं का नहीं ? पर हर दिन कुछ कहता है, सो इस महिला दिवस के मानाने की भी अपनी कहानी है. कभी महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई से आरंभ हुआ यह दिवस बहुत दूर तक चला आया है, पर इक सवाल सदैव
 
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तेली के बैल का गोल-गोल चक्कर…

  इस पूरे प्रकरण पर कुछ नया कहने लायक बचा ही नहीं है। मूल पोस्ट और उसकी चर्चा के बीच अभिमन्यु प्रसंग की याद दिलाती एक अन्य पोस्ट और इन पोस्टों पर आयी टिप्पणियों को आद्योपान्त पढ़ने के बाद मन बड़ा दुविधाग्रस्त हो गया। कुछ बोलें कि न बोलें। जार्ज बुश की
 
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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दर्द तो अंग अंग में हो रहा है, पर मज़ा भी आ रहा है ..

कई दिनों तक घर से बाहर था । कवि-सम्मेलनीय यात्रा के चलते देश के अधिकांश हिस्सों में उपस्थिति लगा कर कल जैसे ही लौटा और कंप्यूटर पर बैठा आप से बात करने के लिए और कुछ लिखने केलिए तो निकट के शहर वापी से फोन आ गया कवि-सम्मेलन मेंकविता पढने का ।मैंने मना कर
 
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फिर से महिला-आरक्षण का झुनझुना

एक बार फिर से महिला आरक्षण विधेयक को उसके मूल स्वरूप में केंद्रीय मंत्रिमंडल को भेज दिया गया है। गाहे-बगाहे हर साल देश की आधी आबादी के साथ यह नौटंकी चलती है और नतीजा सिफ़र. इस देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष व मुख्यमंत्री पदों पर महिला
 
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रिटायरी कालोनी {अपनी बात}

रिटायरी कालोनी शायद अपना घर सब का ही सपना होता है। फिर जब आदमी अपने जीवन का सुनहरी समय सरकारी मकान मे रह कर गुज़ार दे तो उसके लिए तो अपना घर और भी अहम बात हो जाती है। फिर जब आदमी रिटायर होने के करीब आता है तो लोग अक्सर ये सवाल करने लगते हैं * अपना घर बना
 
निर्मला कपिला
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सबसे अहम मौके पर तुम हार गये हो “विभूति”

यह महज़ उम्र का मामला नहीं होतासवाल, सवाल होते हैंजिसे तुम हर बार टाल जाते होबचकाना कहकरतुम्हारी लड़ाईयों पर हमे यकीन हैहमे यकीन है कि हम बचे हैंहमारे बच्चे मस्जिद में अब भीनमाज़ अदा करने जाते हैंथोड़ा डर सहम के साथवे गुजरात में भी रह ही लेते हैंहमारे जिंदा
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श्री विभूति नारायण राय, कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के नाम एक पत्र

दिल्ली 9 फरवरी 2010प्रिय विभूतिजीअभिवादन !उम्मीद है, स्वस्थ होंगे .लम्बे समय से इस उधेड़बुन में था कि चन्द बातें आप तक किस तरह संप्रेषित करूं ? व्यक्तिगत मुलाकात संभव नहीं दिख रही थी, सोचा पत्र के जरिए ही अपनी बात लिख दूं. और यह एक ऐसा पत्र हो, जो सिर्फ
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दोस्तों ! समय बहुत ख़राब है...दुआ करना सब ठीक हो

चलो जी !एक बार फिर बैग भर लिया है और टूर पर निकला हूँबहुत सी जगह लोगों को हँसाना है..........10-02-2010 जयपुर11-02-2010 महेसाणा12-02-2010 जयपुर ( दोबारा )13-02-2010 बारां15- 02-2010 भुवनेश्वर16-02-2010 मुम्बई______________________17-02-2010 लौट के बुद्धू
 
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अनिल चमड़िया एक अनैतिक टीचर हैं: विभूति नारायण राय को जबाब

मीडिया फार भड़ास पर प्रकाशित साक्षात्कार के संदर्भ में ............. अफसोस, अफसोस इस बात का कि पुरानी कहावतों से विभूति जी कुछ नहीं सीख सके (उल्टा चोर कोतवाल को डांटे), अफसोस कि एक अच्छा आदमी बनने के लिये जिस सब्र की जरूरत है वह नहीं रही, अफसोस कि आप एक
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विभूति नारायण राय......Unscrupulous …है.. - नामवर सिंह

श्री नामवर सिंह ने श्री काशीनाथ सिंह को निम्न पत्र लिखा था-जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालयनई दिल्ली-11000678-04-८४प्रिय काशी,श्री विभूति नारायण राय के बारे में जो कुछ सुना है उससे उनके बारे में मेरी राय अच्छी नहीं है। वे बड़े महत्वाकांक्षी आदमी हैं और
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विभूति जी सुनिये अनिल चमड़िया सराब पीते हैं, गलत करते हैं न

यह छूठ जब कुलपति विभूति नारायण राय द्वारा फैलाया गया तो अनिल चमड़िया ने एक लेख लिखा था जो कई अखबारों में छपा था इसे यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है- वैसे यहाँ यह मसला नहीं था कि सराब पीने पर बात की जाती पर इससे यह पता जरूर लगाया जा सकता है कि अनिल चमड़िया को
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अगर नहीं आऊंगा तो ये कहने आऊंगा कि नहीं आऊंगा

भारत-भारती के समारोह के लिए पुणे पहुँचने में जब मुझेविलम्ब हो गया और मैं अभी लोनावला में ही अटका था तबआयोजन समिति के मुखिया श्रीनिवास कुन्दला जी ने मुझसेबार-बार सम्पर्क किया और मुझे ज़रूर ज़रूर पहुँचने काआग्रह किया । तब मैंने उनसे कहा-वादा किया है तो
 
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घुस पैठी थकान…

  इतवार का बिहान सिर तक रजाई लिए तान घर में की खटपट से बन्द किए कान आंगन में धूप रही नाच छोटू ककहरा किताब रहा बाँच फिर भी न आलस पर आने दी आँच कुंजीपट खूँटी पर टांग धत्‌ कुर्सी कर्मठता का स्वांग दफ़्तर में अनसुनी है छुट्टी की मांग   कूड़े का ढेर
 
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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आप टेन्शन मत लीजिये बापू ! हमारे यहाँ लोकतन्त्र में कोई ऊंच नीच नहीं है, सब नीच ही नीच है

मेरी भावना का लोकतन्त्र वह हैजिसमें छोटे से छोटे व्यक्ति की आवाज़ को भीउतना ही महत्व मिले जितना एक समूह की आवाज़ को- महात्मा गांधीहाय बापू !पुण्यतिथि का वार्षिक यानी औपचारिक प्रणाम ।समाचार ये है कि आपको कोई टेन्शन लेने की ज़रूरत नहीं है ।आप वहां आराम से
 
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प्रेस क्लब का बैन का फैसला सही

छत्तीसगढ़ की मीडिया को दलाल कहने वाले मानवाधिकारवादियों को नक्सलियों का हमदर्द मानते हुए रायपुर प्रेस-क्लब ने ऐसे किसी संस्था और व्यक्ति का अपने यहां नहीं बुलाने का निर्णय लिया है. बैन के इस फैसले में कोई बुराई नहीं दिखती. महानगरों के पत्रकार लगातार
 
राजेश अग्रवाल
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पुण्यदायी व्यवसाय- तीर्थयात्रा कम्पनी…!

  भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने हेतु आदि शंकराचार्य नें भारत के चार दिशाओं में चार धामों की स्थापना की। उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम , पूरब में जगन्नाथपुरी एवं पश्चिम में द्वारका - हिन्दुओं के चार धाम हैं। आस्थावान हिन्दू इन
 
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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हे भाग्य विधाता !!

लोकतंत्र यदि मानव होता ,चीख चीख रोता चिल्लाता ।अब कितना अपमान सहुंगा ,बतलाओ हे भाग्य विधाता ॥है स्वतंत्र गणतंत्र राष्ट्र पर , क्या सब जन स्वतंत्र अभी हैं ?जो निर्धन ,निर्बल, दुर्बल हैं ,वो सारे परतंत्र अभी हैं ॥जिसके हाथ में मोटी लाठी , भैंस हांक कर
 
अजय कुमार