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एक नया अह्द चलो आज उठाया जाये: अज़मल जी की ग़ज़ल

तो इस बार पेश-ए-नज़र है एक युवा और बेहद प्रतिभाशाली शायर अज़मल हुसैन खान ’माहक’ की एक खूबसूरत ग़ज़ल।लख्ननऊ मे रहने वाले अज़मल साहब पेशे से फीजिओथेरिपिस्ट हैं और साहित्य से खासा जुड़ाव रखते हैं। हिंदी और अंग्रेजी के अलावा उर्दू और फ़ारसी पर अधिकार रखने के साथ
 
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एक अच्छी नींद – नचिकेता

नचिकेता के गीत पत्रिका उदभावना के पन्ने पलटते हुए, बहुत समय के बाद नचिकेता के गीत पढ़ने को मिले. उनका हर गीत कई आयामों से बावस्ता होता है और पाठक से सीधे संवाद करता है. इनको गुनगुनाना इनके प्रभाव को कई गुना कर देता है. इस बार उनका एक गीत प्रस्तुत है. एक
 
रवि कुमार, रावतभाटा