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क्षमादान का मूल्य

क्षमादान की शक्ति और उसके महत्व का मोल वही आंक सकते हैं जिन्हें क्षमादान मिला होता है. कुछ तीर्थयात्रियों का दल मंदिर में दर्शन कर रहा था. उनमें से एक श्रद्धालु को ईश्वर की उपस्तिथि का अनुभव होने लगा. वह समाधि में चला गया और उसने ईश्वर से कहा –
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शैतान की दुकान

बदलती हुई दुनिया के साथ ताल-से-ताल मिलकर चलने की इच्छा से शैतान ने यह तय किया कि वह अपने प्रलोभनों के पुराने स्टॉक को सस्ते में निकाल देगा. उसने अखबार में इसके लिए एक विज्ञापन भी छपवा दिया और उसकी दुकान में ग्राहकों की भीड़ लगने लगी. टेबलों पर करीने से
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ईश्वर की परछांई

बहुत पुरानी बात है. कहीं एक भला आदमी रहता था जो सभी से असीम प्रेम करता था और सारे जीवों के प्रति उसके ह्रदय में अपार करुणा थी. उसके गुणों से प्रसन्न होकर ईश्वर ने उसके पास अपना देवदूत भेजा. “ईश्वर ने मुझे आपके पास यह कहने के लिए भेजा है कि वे आपसे
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दो बूंद तेल

एक व्यापारी ने अपने पुत्र को प्रसन्नता का रहस्य जानने के लिए एक बुद्धिमान वृद्ध के पास भेजा. चालीस दिन और चालीस रातों तक रेगिस्तान में चलता हुआ वह युवक अंततः एक पर्वत के शिखर पर बने हुए सुन्दर किले के पास पहुँच गया. वह बुद्दिमान वृद्ध वहीं रहता था. उस
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शैतान से सवाल

एक लड़का दुकान से डबलरोटी खरीदने जा रहा था. उसी समय वहां से शहर का मेयर गुज़रा.“तुम्हें पता है वह इतना शक्तिशाली क्यों है? क्योंकि वह शैतान के बताये रास्ते पर चल रहा है” – एक आस्थावान वृद्धा ने लड़के से कहा. लड़के को कुछ समझ में नहीं आया.
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झींगुर

अमेरिका का एक मूल निवासी (इंडियन) और उसका एक मित्र न्यू यॉर्क के टाइम स्क्वायर में घूम रहे थे. शाम का वक़्त था और सड़क में बहुत सारे लोग घूम रहे थे. चारों तरफ से गाड़ियों के हॉर्न, ब्रेक, सायरन की कानफोडू आवाजें आ रहीं थीं. साथ चलते हुए व्यक्ति की बातें सुन
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सपने सच होंगे

कहीं किसी शहर में एक छोटा लड़का रहता था. उसके पिता एक अस्तबल में काम करते थे. लड़का रोजाना देखता था कि उसके पिता दिन-रात घोड़ों की सेवा में खटते रहते हैं जबकि घोड़ों के रैंच का मालिक आलीशान तरीके से ज़िंदगी बिताता है और खूब मान-सम्मान पाता है. यह सब देखकर
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मुर्दों को मुर्दे दफनाने दो

ईसा मसीह ने एक दिन सुबह-सुबह एक झील के किनारे एक मछुआरे को मछलियाँ पकड़ते देखा. मछुआरा झील में जाल डाले बैठा हुआ मछलियाँ फंसने का इंतज़ार कर रहा था. ईसा ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उससे पूछा – “भाई, कब तक मछलियाँ मारते रहोगे”? मछुआरे न
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श्रीराम के दरबार में कुत्ता

एक दिन एक कुत्ता श्रीराम के दरबार में आया और उसने प्रभु से शिकायत की – “राजन, कितने दुख की बात है कि जिस राज्य की कीर्ति चहुंओर रामराज्य के रूप में फैली हुई है वहीं लोग हिंसा और अन्याय का सहारा लेते हैं. मैं आपके महल के पास ही एक गली में
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मैं ही क्यों?

महान विम्बलडन विजेता आर्थर ऐश को १९८३ में ह्रदय की सर्जरी के दौरान गलती से ऐड्स विषाणु से संक्रमित खून चढ़ा दिया गया था। वे ऐड्स रोग की चपेट में आ गए और मृत्युशय्या पर थे। दुनिया भर से उनके चाहनेवाले उन्हें पत्र लिख रहे थे। उनमें से ज्यादातर लोग आर्थर
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मूसा के पदचिन्हों पर

रब्बाई ज़ूया जीवन के रहस्यों की खोज कर रहा था। उसने निश्चय किया कि वह पैगम्बर मूसा के पदचिन्हों पर चलेगा। कई सालों तक वह पैगम्बर की भांति वेश बनाये घूमता रहा और उन्हीं के जैसा व्यवहार करता रहा। लेकिन उसके भीतर कोई भी परिवर्तन नहीं आया था। उसे किसी भी
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प्राणीमात्र के लिए दया

डॉ. अल्बर्ट श्वाइट्ज़र (1875 -1965 ) फ्रांसीसी-जर्मन चिकित्सक, दार्शनिक, और संगीतकार थे. उन्होंने अपना लगभग सारा जीवन मध्य अफ्रीका के बेहद अभावग्रस्त क्षेत्रों में मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया और उन्हें इसके लिए वर्ष 1952 के नोबल शांति पुरस्
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आस्था और विश्वास

पर्वतारोहियों का एक दल एक अजेय पर्वत पर विजय पाने के लिए निकला. उनमें एक अतिउत्साही पर्वतारोही भी था जो यह चाहता था कि पर्वत के शिखर पर विजय पताका फहराने का श्रेय उसे ही मिले. रात्रि के घने अन्धकार में वह अपने तम्बू से चुपके से निकल पड़ा और अकेले ही
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चीन के बांस की शिक्षा

चीन के बांस को उगाना बड़ा दुरूह कर्म है. इसका छोटा सा बीज लेकर आप इस बोते हैं और साल भर तक इसे पानी और खाद देते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता. दूसरे साल भी आप इसे पानी और खाद देते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता. तीसरे साल भी आप इसे पानी और खाद देना ज़ारी रखते [.
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100 वें बंदर की क्रांति

प्रकृतिविज्ञानियों ने जापान के प्रसिद्द और खूबसूरत मकाक बंदरों का उनके प्राकृतिक परिवेश में 30 सालों तक अध्ययन किया. 1952 में जापान के कोशिमा द्वीप पर प्रकृतिविज्ञानियों ने बंदरों को खाने के लिए शकरकंद दिए जो रेत में गिर जाते थे. बंदरों को शकरकंद का
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गरुड़ और कौवे की कहानी

एक दिन एक कौवे ने विशालकाय गरुड़ पक्षी को भेड़ का एक छोटा मेमना अपने पंजे में दबाये हुए अपने घोंसले की और उड़ते देखा. “बढ़िया भोजन पाने का यह अच्छा तरीका है” – कौवे ने सोचा – “मैं भी इसी तरह एक मेमना पकड़ लूँगा”. कौव
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ईश्वर का उपहार

मिश्रजी को कोई राह नहीं बूझ रही. आज फिर उनसे वही गलत काम हो गया जिसको न करने का प्रयास वे सालों से करते आ रहे हैं. “अब क्या किया जाए” – सोच रहे हैं मिश्रजी “कोई रास्ता तो निकालना पड़ेगा. क्यों न स्वयं को दंड दिया जाए? जब भी गलत
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दो बाल्टियों की कहानी

किसी गाँव में एक किसान को बहुत दूर से पीने के लिए पानी भरकर लाना पड़ता था. उसके पास दो बाल्टियाँ थीं जिन्हें वह एक डंडे के दोनों सिरों पर बांधकर उनमें तालाब से पानी भरकर लाता था. उन दोनों बाल्टियों में से एक के तले में एक छोटा सा छेद था जबकि दूसरी बा