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काही अश्या रीतीने…

काही अश्या रीतीने तुझ्या पापण्या माझ्या पापण्यांशी मिळु दे अश्रु तुझे सारे माझ्या पापण्यांवर सजु दे…. तु प्रत्येक वेळी,प्रत्येक क्षणी माझ्याबरोबरच राहिली आहेस हा हे शरीर कधी दुर तर कधी जवळ राहिल असेल तुझ्या सगळ्या दु:खांना आता तु माझा पत्ता
 
देवेंद्र चुरी
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"कभी कुछ नही बचेगा : Percy Bysshe Shelley " (अनुवाद-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

Oh Never More : Percy Bysshe Shelleyअनुवाद-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"  ओ संसार!ओ जीवन!ओ समय!जो भी तुम्हारीअन्तिम सीढ़ी पर चढ़ावो कँपकपाया जो पहले से हीयहाँ पर विद्यमान थाजब वह लौटेगा अपनी सर्वोच्च महिमा परतब कुछ नही बचेगाकभी
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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मधुबाला - ३ : मधुप

मधुबाला मूळ हिंदी कवी : हरिवंशराय ’बच्चन’भावानुवाद : मिलिंद मधुबाला - ३ मधुशाला - १मधुशाला - २मधुपमूळ हिंदी कविताभावानुवाद १.मधु-प्यास बुझाने आए हम,मधु-प्यास बुझाने हम आए !पग-पायल की झनकार हुई,पीने को एक पुकार हुई,बस हम दीवानों की टोलीचल देने को
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“प्यार और मित्रता:Emily Bronte” (अनुवादक:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

Love and Friendship poem  :Emily Bronte अनुवादक:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक” प्यार  एक जंगली गुलाब है लेकिन मित्रता एक सदाबहार पेड़ है -- -- जंगलों के झुरमुट में गुलाबी आभा लिए जंगली गुलाब खिलता है लगातार तब ऐसा प्रतीत होता है  मानों
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“जहरीला पेड़:William Blake” (अनुवादक:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“चम्पू काव्य” A Poison Tree a poem by William Blake  अनुवाद:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक” मित्र से नाराज होकर पूछता मैं “क्रोध” से जिसका नही कुछ ओर है ना कोई जिसका छोर है घुस गया अन्तस में मेरे आज कोई चोर है शत्रु से नाराज होकर पूछता हूँ मैं यही
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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सुविचार २

कोणताही कलाकार हा काहितरी साध्य करण्याच्या इच्छेने भारलेला असतो. त्याला काही कोणाला हरवायची इच्छा नसते – ऍन रॅंड. आजूबाजूला कोणी नसतानाही जेव्हा विनाकारण तुम्हाला हस येतं, तेव्हा खुशाल समजावं की तुम्ही मनापासून हसतायं – ऍंडी रूनी. आज तुम्ही शांतपणे
 
माझी दुनिया
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“कल इतिहास है: Emily Dickinson” (अनुवादक: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

"Yesterday is History": Emily Dickinson अनुवादक :डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक” कल इतिहास है जिसका आभास है जो बहुत दूर है लेकिन पास है कविता है “कल” जो मचलती है हर पल कविता एक दर्शन है यही तो आकर्षण है कविता एक रहस्य है कौतूहल है चतुराई से की गई अटकल है
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“एक लाल-लाल गुलाब” (अनुवाद:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

A Red Red Rose poem - Robert Burnsअनुवादक: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक” लाल-लाल गुलाब का नज़ाराप्यार का रंग है  बहुत प्यारालाल-लाल गुलाब की तरह होता है  इसका नज़ारा  जून में चहका है मधुमास मीठी धुनों का
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“अलविदा प्यार!” (अनुवादक:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

Farewell Love poem - Thomas Wyatt अनुवादक:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक” प्रेम गीत को विदाई अलविदा! प्रेम के  कायदे कानूनों को अलविदा! उलझनों से मुक्त हो जाऊँगा सर्वदा! सेनेक और प्लेटो मुझे पुकारते हैं बुद्धिमानों कहकर मुझे उजारते हैं दौड़-धूप से दौलत
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“John Masefield की Beauty कविता का हिन्दी अनुवाद” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

मित्रों! आज से उच्चारण पर विदेशी कवियों की कविताओं के अनुवाद की श्रंखला प्रारम्भ कर रहा हूँ! इस कड़ी में आज प्रस्तुत है- John Masefield कीBeauty कविता का हिन्दी अनुवाद- सौंदर्य जॉन मेसफील्डप्रातःकालीन वेला मेंऔरसायंकालसूर्यास्त के समयपहाड़ियों
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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मधुबाला - २ : मधुशाला-मालक

मधुबाला मूळ हिंदी कवी : हरिवंश राय ’बच्चन’भावानुवाद : मिलिंदमधुबाला - २ मधुशाला - १मधुशाला-मालकमूळ हिंदी कविताभावानुवाद१.मैं ही मधुशाला का मालिक,मैं ही मालिक-मधुशाला हूँ !मधुपात्र, सुरा, साकी लाया,प्याली बाँकी-बाँकी लाया,मदिरालय की झाँकी लाया,मधुपान
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काही अनुवादित सुविचार १

जर तुम्ही मूर्खांशी वाद घालण्यात सगळं आयुष्य घालवलंत, तर तुम्ही थकून जालं याउप्पर तो मूर्ख मूर्खच राहिल.***** तुम्ही करत असलेलं काम तुमच्या लायकीचे आहे की नाही हे ठरविण्याचा उत्तम मार्ग म्हणजे….करण्याकरिता तुमच्याकडे कामच नाहिये अशी कल्पना करून
 
माझी दुनिया
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मधुबाला - १

मधुबाला मूळ हिंदी कवी : हरिवंश राय ’बच्चन’भावानुवाद : मिलिंदमधुबाला - १मूळ हिंदी कविताभावानुवादमधुवर्षिणि,        मधु बरसाती चल,             बरसाती चल,  
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इस रेस्तराँ का नाम है “Translate Server Error"!!!

चीन में एक रेस्तराँ का नाम अंग्रेज़ी में 'Translate Server Error' लिख दिया गया। हुआ यह था कि किसी तकनीकी समस्या के कारण कंप्यूटर पर चीनी नाम के अनुवाद के बदले 'Translate Server Error' का संदेश दिखा और अंग्रेज़ी नहीं जानने के कारण या हड़बड़ी में यही
 
सुयश सुप्रभ Suyash Suprabh
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'न हो कोई पहचान' और एक पहेली

आज कुछ नहीं , बस्स , बाबा बुल्ले शाह की एक पंक्ति और इस अकिंचन द्वारा किया गया उसका अनुवाद : चल वे बुल्लेया ! चल ओत्थे चल्लिए , जित्थे सारे आन्ने ! ना कोई साड्डी जात पिछाने , ते ना कोई सानू मान्ने ! *******चलो बुल्ला ! चलो वहाँ चलें जहाँ है अन्धों का
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निकानोर पार्रा की कविता: एक अजनबी के लिए खत

जब गुजर जाएंगे साल,साल जब गुजर जाएंगे औरहवा बना चुकी होगी एक दरारमेरे और तुम्हारे दिलों के बीच;जब गुजर जाएंगे साल और रह जाउंगा मैंसिर्फ एक आदमी जिसने मोहब्बत की,एक नाचीज जो एक पल के लिएतुम्हारे होटों का कैदी रहा,बागों में चलकर थक चुका एक बेचारा इंसान
 
चन्दन
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निकोलस गियेन की कविता- पहेलियाँ

दाँतों में, सुबह,और रात चमड़ी में।कौन है, कौन नहीं?......... नीग्रोउसके एक सुन्दर स्त्री न होने पर भी,वही करोगे जो उसका हुक्म होगा।कौन है, कौन नहीं?......... भूखगुलामों का गुलाम,और मालिक के संग जुल्मी।कौन है, कौन नहीं?......... गन्नाछुपा लो उसे एक हाथ
 
चन्दन
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मेहनत कश के लिए रूखी सूखी और आराम करने वालों के लिए हलवा पूरी - 1

बंधु राजेश्वर राव खरे जी मूलत: व्यंग्यकार है इस कारण उन्होने अपने इस कविता संग्रह का नाम भी व्यंग्यात्मक रखा है, हम यहा इस संग्रह में से कुछ कविताओ का हिन्दी अनुवाद क्रमश: प्रस्तुत करेंगे.  आज उनकी माटी वन्दना प्रस्तुत कर रहे है आगे उनके
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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निकोलस गियेन की कविता : एक सर्द सुबह

सोचता हूं उस सर्द सुबह को कि जिसमें गया था मिलने तुम्हें,वहां जहां हवाना जाना चाहता है खेतों की खोज में,वहां तुम्हारे रौशन उपांत में।मैं अपनी रम की बोतलऔर अपनी जर्मन कविताओं की किताब के साथ,जो आखिरकार तुम्हें दे आया था तोहफे में।(या फिर रख लिया था तुमने
 
चन्दन
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बसंत में बिरह - छत्तीसगढी कविता आडियो हिन्दी भावानुवाद सहित

जानि डारेव रे कोयली तोर काय चाल हेपहिली तै फुदुक फुदुक कुदे डारा डारानेवता नेवते अमरइया जा के झारा झाराअमुआ के रुख फेर सबला तै बलायेभवरा के मोहरी संग गीत गुंगुनायेफेर मोला नइ पुछेस काय हाल हेजानि डारेव रे कोयली तोर काय चाल हेकतका जियानत हावय पिरा मितवा
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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होर्खे लुइस बोर्खेस की कविता : अनुपस्थिति

जैसे शमशेर हिन्दी में कवियों के कवि कहे जाते हैं वैसे ही अर्जेंटीना का यह शख्स समूचे विश्व के कवियों का कवि, कथाकारों का कथाकार कहा जाता है। ऐसा रचनाकार जिसके प्रभाव से कोई नासमझ ही बच सकता है। तुर्रा यह कि हिन्दी के साहित्य संसार में कुछ बिल्कुल ही नही
 
चन्दन
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निज़ार कब्बानी की दो कवितायें

निज़ार कब्बानी (1923-1998) अरब जगत में प्रेम , ऐंद्रिकता , दैहिकता और इहलौकिकता के कवि अपनी कविता के बल पर बहुत लोकप्रिय नामचीन गायकों ने उनके काव्य को वाणी दी है. साहित्यिक संस्कारों वाले एक व्यवसायी परिवार में जन्में निज़ार ने दमिश्क विश्वविद्यालय से
 
चन्दन
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अणु-अणु सँवर-सँवर तिल-तिल मिट-मिट पूरा करार करतीं हूँ

उमर-खैयाम की रूबाइयों के अनुवादक पंडित केशव पाठक के बारे में जितना लिखा जाए अंतर जाल के लिए कम ही है मुझे विस्तार से जानकारी न होने के कारण जो भी लिख रहा हूँ श्रुति के आधार पर फिर भी कुछ जानकारीयां  उपलब्ध किताब में मिलते ही लोभ संवरण न कर सका जाने
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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मार्ती - निकोलस गियेन की कविता

निकोलस गियेन: क्यूबा के ‘राष्ट्रीय कवि’। ‘ब्लैक पोयट्री’ के प्रतिनिधि कवि। पूरा नाम निकोलस क्रिस्तोबाल गियेन बतिस्ता। क्यूबा के कामाग्वे में जन्म (1902-1989)। कवि, पत्रकार और राजनीतिक कार्यकर्ता।यह कविता क्यूबा के पूर्वोत्तर में स्थित एक शहर मार्ती पर
 
चन्दन
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बस इतना ही

रूक, जरा रूक। इस उच्चासन से रखने दे मुझे पाँव नीचे। फिर छूना उन्हे। रहे मेरे पाँव ज़मीन पर हरदम और तेरा नत होना संपूर्ण। बस इतना ही कहना है मेरा। (मेरी मराठी कविता ‘दर्शन’ का अनुवाद)
 
डॉ.श्रीकृष्ण राऊत
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छलक-छलक गिर जाता पानी

रचना में शिल्प को महत्वपूर्ण मानने वालों को जान लेना चाहिए कि जब रचनाकार अपने परिवेश को बहुत निकट से पकड़ने की कोशिश करता है तो कथ्य खुद ही अपना शिल्प गढ़ लेता है। माओवादी उभार से काफी पहले नवे दशक के नेपाल के एक गांव का चित्र खींचते हुए नेपाली कथाकार
 
vijay gaur/विजय गौड़
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दुरावा…

हा दुरावा… हया प्रवासातील दुरावा नजरेतील दुरावा सख्यासोबत्यांचा दुरावा मिटुन दे सगळा दुरावा का कोणी जवळ आहे का कोणी दुर आहे नाही माहित इथे कोणाला जवळ येत आहे कि दुर जात आहे मी मला कळतच नाही आहे तरी कुठे मी हा दुरावा… कधी झाल अस, एकट्या
 
देवेंद्र
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कैथरीन विलियम्स की एक कविता

जितना मुझे याद है उससे ज्यादा भूल चुकी है                              एक बिखरे अतीत की                       
 
jagadishwar chaturvedi
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चार्ल्स डार्विन की आत्म कथा के अनुवाद की बात [पूर्व-कथन] - सूरजप्रकाश

अनुवाद साहित्य महत्वपूर्ण कार्य है और वरिष्ठ कथाकार सूरजप्रकाश अभियान की तरह यह कार्य करते रहे हैं। साहित्य शिल्पी पर "चार्ल्स डारविन की आत्मकथा" का अनुवाद अब प्रत्येक शनिवार को प्रस्तुत होगा। किंतु इस महान कार्य को संपन्न करने के पीछे सूरज जी की क्य
 
साहित्य-शिल्पी
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मिटवू तृष्णा, नंतर करुया देवा-धर्माच्या गोषी

मिटवू तृष्णा, नंतर करुया देवा-धर्माच्या गोष्टीपेले भिडवत करुया पावन तीर्थप्रसादाच्या गोष्टीनटुनी-सजुनी साद घालते आहे जग, तू पहा जराजीवन भोगुन होण्याआधी का परलोकाच्या गोष्टी ?कालपावेतो छेडित होती नजरेला देऊन नजरझुकले डोळे कसे अचानक, का संकोचाच्या गोष्टी
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बाग समजावून थकली

बाग समजावून थकली, फूल कोठे ऐकतेऊन जर भाग्यात आहे, का दवावर भाळते ?भोगुनी दररोज दुःखे, लागले आहे व्यसनभंगल्या हृदयास लज्जत वेदनेची भावतेमीलनाचे गूज मी सांगू कसे, लाजेल तीएव्हढे सांगेन, धुंदी आजही रेंगाळतेपारध्याचे नाव मी ओठी जरी ना आणलेजाणतो पण कोण
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आईये, शिव के धनुष का स्वागत करें

यह दो घटनाएँ ऐसी है जिन पर विचार करते करते एक ऐसी संस्था की परिकल्पना ने आकार लिया जो न केवल वेब-अनुप्रयोगों का हिन्दी व हमारी अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद करे साथ ही विकि जैसे ज्ञानकोशों को भी भरने का काम करे.
 
संजय बेंगाणी
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मार्लो की एक कविता - सय्यैद अली हामिद

कुमायूं विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी के विभागाध्यक्ष तथा इस समय सोबन सिंह जीना परिसर अल्मोडा में कार्यरत हामिद सर एक अद्भुत अध्यापक होने के साथ-साथ विलक्षण अनुवादक तथा कवि भी हैं। उन्होंने उर्दू कवियों के अंग्रेज़ी अनुवाद किए हैं, जो अकादमिक रूप से अत्य
 
शिरीष कुमार मौर्य
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जेम्स बॉल्ड्‌‍विनच्या आत्मचरित्रात्मक नोंदी

मूळ इंग्रजीतील लेख: http://www.nytimes.com/books/first/b/baldwin-essays.htmlलेखक: James Baldwinपुस्तक: 'Notes of a Native Son' , Beacon Press, (1955)माझा जन्म हार्लम मध्ये एकतीस वर्षांपूर्वी झाला. मी वाचायला शिकलो त्याच सुमारास कादंबर्‍यांची कथानके