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पसीने की धारा-हिन्दी व्यंग्य कवितायें

कभी मेरे बहते हुए पसीने पर तुम तरस न खाना, यह मेरे इरादे पूरे करने के लिये बह रहा है मीठे जल की तरह, इसकी बदबू तुम्हें तब सुगंध लगेगी जब मकसद समझ जाओगे। सिमट रहा है ज़माना वातानुकुलित कमरे में सूरज की तपती गर्मी से लड़ने पर जिंदगी थक कर आराम से सो जाती,
 
दीपक भारतदीप
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रहस्य-हिन्दी शायरी

दौलत, शौहरत और ताकत का नशा भले चंगे को रास्ते से भटका देता है, शिखर पर पहुंचे हैं जो दरियादिल उनसे जज़्बाती हमदर्दी का उम्मीद करना बेकार है, क्योंकि हो जाते हैं उनके सपने पूरे पर दर्द के अहसास मर जाते हैं। हाथ फैलायें खड़े हैं नीचे उनसे दया की आशा करने
 
दीपक भारतदीप
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दूसरे की सोच पर चलकर-हिन्दी शायरी

हम खुली आंखों से सपने देखते रहें, हम अमन से जियें, जंग के दर्द दूसरे सहें, कोई करे वादा तो शिखर पर बिठा देते हैं वोट देकर। हम खूब कमाकर परिवार संभालें, दूसरे अपना घर उजाड़ कर, ज़माने को पालें, कोई दे पक्की गांरटी तो पीछा छुड़ाते हैं नोट देकर, शायद नहीं
 
दीपक भारतदीप
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विकासवादी और पुरातनवादी-हिन्दी कविता

स्त्री का भला करेंगे, बच्चों को खुश करने के दावें भरेंगे, वृद्धों का उद्धार करेंगे, मजदूरों को न्याय देंगे, गरीब को करेंगे अमीर, और लाचार का सहारा बनेंगे, ऐसे दावे धोखा है, बेईमानी का खोखा है। समाज को एक जैसा बनाने की कोशिश करने वाले विकासवादी अक्लमंद
 
दीपक भारतदीप
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इंसान सस्ता हो रहा है-क्षणिकायें

महंगाई आसमान पर चढ़ गयी है, इसलिये नैतिकता तस्वीर में जड़ गयी है। चीजों की तरह इंसान भी बिकने लगा है, मांग आपूर्ति के नियम से अनुसार जरूरत से ज्यादा है बाज़ार में इसलिये मेहनत की कीमत पड़ रही है। ——— आधुनिकता के नाम पर इंसान सस्ता हो रहा
 
दीपक भारतदीप
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ज़माने में जंग की आग लगाकर-हिन्दी शायरी

बंदूक के सहारे ज़माने में बदलाव लाने की कोशिश हथियारों के सौदागरों के दलाल की चाल लगती है, खून बहाकर तरक्की के रास्ते चलने का ख्याल डाकुओं जैसा लगता है, दुनियां के जिंदा रहने के लिये कुछ मूर्तियों का टूटना जरूरी है शैतानों का ख्याल लगता है दरअसल जिनकी रूह
 
दीपक भारतदीप
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चमन में अमन है-हिन्दी व्यंग्य कविता

दहशतगर्द घूम रहे आजाद उनकी गोलियों से सभी तो नहीं मर गये फिर भी जिंदा हैं ढेर सारे लोग इसलिये मान लो चमन में अमन है। खेल के नाम पर चल रहा जुआ जिनकी मर्जी है वही तो खेल रहे हैं बाकी लोग तो बैठे हैं चैन से इसलिये मान लो चमन में अमन है। [...]
 
दीपक भारतदीप
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हिन्दू धर्म संदेश-नीच स्वभाव होने पर ऊंचे कुल का सम्मान नहीं मिलता

य ईर्षुः परवित्तेषु रूपे वीर्य कुलान्वये। सुखभौभाग्यसत्कारे तस्य व्याधिनन्तकः।। हिंदी में भावार्थ-जो दूसरे का धन, सौंदर्य, शक्ति और प्रतिष्ठा से ईर्ष्या करता है उसकी व्याधि की कोई औषधि नहीं है। न कुलं वृत्तही प्रमाणमिति मे मतिः। अन्तेध्वपि हि जातानां
 
दीपक भारतदीप
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असली और नकली जांबाज-हिन्दी शायरी

मैदान पर लड़ते कम किनारे पर खड़े दिखाते दम कागजी जांबाजो के करतब कभी अंजाम पर नहीं पहुंचे पर हर पल उनको अपनी आस्तीने ऊपर करते हमने देखा है। कीर्तिमान बहुत सुनते हैं उनके पर कामयाबी के नाम पर खाली लेखा है। ———- पत्र प्रारूप पर हाशिए पर नाम
 
दीपक भारतदीप
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कामयाबी और खौफ-हिन्दी शायरी

अपनी कामयाबी भी उनको तब तक हज़म नहीं हो पाती है, जब तक दूसरे की नाकामी की खबर उनके पास न आती है। दुनियां का यही दस्तूर है मूर्खों का भी क्या कसूर है सभी लोगों दूसरे की छोटी लकीर से बड़ी लकीर खींचना नहीं आती है। ——— हर रोज वह कामयाबी के
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नैतिकता की बात-हिन्दी व्यंग्य कविता

आपस में जाम टकराते हुए लोग नैतिकता की बात करने लग जाते हैं, फिर सुनाते हैं अपनी कमाई के नुस्खे जैसे दो नंबर की कमाई एक नंबर की हो सीना फुलाकर उसकी कहानी सुनाते है।। बहुत अच्छा लगता है आदर्श और नैतिकता की बात करते हुए बशर्त है आदमी स्वयं से छिप सकता
 
दीपक भारतदीप
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सर्वशक्तिमान और शैतान-हिन्दी हास्य व्यंग्य कथा

सर्वशक्तिमान को यह अहसास होने लगा था कि संसार में उनका नाम स्मरण कम होता जा रहा था। दरअसल अदृश्य सर्वशक्तिमान सारे संसार पर अनूभूति से ही नियंत्रण करते रहे थे और लोगों की आवाज तभी उन तक पहुंचती थी जब उनके हृदय से निकली हो। अपनी अनुभूति के परीक्षण के लिये
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संत कबीर के दोहे-जहां विवाद होते हों, वहां न जायें

कबीर न तहां न जाइये, जहां जु नाना भाव। लागे ही फल ढहि पड़े, वाजै कोई कुबाव।। संत शिरोमणि कबीरदास का कहना है कि वह कभी न जायें जहां नाना प्रकार के भाव हों। ऐसे लोगों से संपर्क न कर रखें जिनका कोई एक मत नहीं है। उनके संपर्क से के दुष्प्रभाव से हवा के एक
 
दीपक भारतदीप
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चूनर जब सरकी

लाज से पलकें झुकी चूनर सर की जब सरकी *** एक अरसे से वह आई ना अब तो मैनें छोड़ दिया है देखना भी आईना *** उसने उसकी बात पर तवज्जो न दी देखिये निगाहों से बहने लगी नदी ~~~
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जबसे आँख लगी है ~~

हर घर के सामने एक कार खड़ी है यूँ तो जिन्दगी खुद उधार पड़ी है ~~~~~~~ लोग 'आँख लगने' को कहते हैं सो जाना पर जबसे आँख लगी है तड़पता हूँ मैं सोने को.
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तोहफों के जाल में प्यार-हिन्दी व्यंग्य कविता (love and gift-hinci satire poem)

अब प्यार जताने का सिलसिला तोहफों से चलने लगा है, इसलिये आदमी तोहफे देकर हर इंसान प्यार खरीदने लगा है। तोहफों की कीमत जितनी बढ़ेगी, प्यार की ऊंचाई भी उतनी लगेगी, नजरों का दोष है कि दिल का प्यार जाहिर करने की ख्वाहिशों के आगे हर तोहफा सस्ता लगने लगा है, मगर
 
दीपक भारतदीप
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नर्तकों के देवता होने का वहम-हिन्दी क्षणिकाऐं

विदुषकों के विद्वान और नर्तकों के देवता होने का वहम पूरे ज़माने को हो गया है, झूठ के सहारे खड़ा है दौलत का महल, इज्जत पाने के लिये, होने लगी सौदे की पहल, ईमान सभी का सो गया है। ———– सर्वशक्तिमान ने दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का
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चाणक्य नीति शास्त्र-हृदय में शुद्धता में निहित है धर्म का भाव

वाचः शौचं च मनसः शौचन्द्रियनिग्रहः। सर्वभूति दया शौचं एतच्छौत्रं पराऽर्थिनाम्।। हिंदी में भावार्थ-वाणी की पवित्रता, मन की स्वच्छता, इंन्द्रियों पर नियंत्रण, समस्त जीवों पर दया और भौतिक साधनों की शुद्धता ही वास्तव में धर्म है। पुष्पे गंधं तिले तैलं
 
दीपक भारतदीप
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धर्म और अवतार-हिंदी हास्य कविता

फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के एक नये अवतार से मिलायें। हमारे दोस्त का आयोजन है इसलिये मिलेगा हमें भक्तों में खास दर्जा, दर्शन कर लो, उतारें सर्वशक्तिमान का इस जीवन को देने का
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अहसास

तुम्हारे प्यार का अहसास लपेटे रहता है मुझे कोहरे साकानों में गुनगुनाता है एक मधुर रागिनीपायल की छनछन, बन जाती है मेरे दिल की धडकनमन मोर नाचने लगता है उसके ताल परऔर इस अहसास में मै, हो रहता हूं मगन अपने में ही ।
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इतने काँटे कौन बोया?

. रात रोया दिन ढोया . इतने काँटे कौन बोया? . रूठी रोटी भूखा सोया . खुद ताउम्र खुदी खोया . दाग पक्के खूब धोया
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क्रिकेट खेल के साथ दूसरी बातें भी जुड़ी हैं-हिन्दी आलेख

भारत में चलने वाली एक क्लब स्तरीय प्रतियोगिता में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नीलामी में किसी ने नहीं खरीदा तो दोनों देशों में हो हल्ला मच गया है। किसी मनुष्य की नीलामी! बहुत आश्चर्य हो रहा है! यह तो गनीमत है कि इस देश में अधिकतर संख्या अभी भी अशिक्षित और
 
दीपक भारतदीप
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कौटिल्य दर्शन-अपनी गलत आदतों की उपेक्षा न करें

प्रकृतिव्यवसननि भूतिकामः समुपेक्षेत नहि प्रमाददर्पात्। प्रकृत्तिवयवसनान्यूपेक्षते यो न चिरात्तं रिपवःपराभवन्ति।। हिंदी में भावार्थ-विभूति की इच्छा से उत्पन्न प्रमाद या अहंकार की प्रकृत्ति से उत्पन्न व्यसनों की उपेक्षा न करें। प्रकृत्ति के व्यसनों की
 
दीपक भारतदीप
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परिष्कृ्त हुआ अन्त:करण ही चमत्कारों को जन्म देता है..........

पिछले लेख में मैने आप लोगों के सामने एक ऎसे इन्सान का जिक्र किया था जो कि किसी भी व्यक्ति को देख कर उसके भूतकालिक जीवन में घटित किसी घटना के बारे में बता देता है। अक्सर होता क्या है कि हम लोग ऎसी किसी घटना को देख सुनकर इसे कोई दैवीय चमत्कार या फिर उस
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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हमदर्दी जताने में कमाई-हिन्दी क्षणिका

हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। शायद लोग दिमाग से सोचते हैं इसलिये हमदर्दी के शब्द जल्दी ढूंढ लेते दिल तक नहीं पहुंचता दूसरे का दर्द कर लेते हैं दिखावे में कमाई। नहीं करना सीखा
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सुख का किश्तों पर मिलना-हास्य कविताएँ (sukh kishton men-hasya kavitaen)

आंधी चलकर फिर रुक जाती है धरती हिलती नहीं भले कांपती नजर आती है। मौसम रोज बदलते हैं उससे तेज भागते हैं, आदमी के इरादे पर सांसें उसकी भी कभी न कभी उखड़ जाती हैं फिर भी जिंदगी वहीं खड़ी रहती है भले अपना घर और दरवाजे बदलती जाती
 
दीपक भारतदीप
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चलो अब इसमें संस्कार बोऊँ !!

~~~~~~~वह असंस्कारित थामैने उसे संस्कार देना चाहामैंने उसे जिन्दगी कासार देना चाहामैने कहा बोलो 'प्रणाम'वह फुसफुसायाअपनी जुबान हिलायाऔर बोला 'रोटी'मैं समझ गया किवह भूखा हैमैने उसे रोटी खिलाईठंडा पानी पिलाया वह शातिर था -वह अपनी भूख को भुना रहा था वह अब
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बिस्तर क्यूँ इतना सलवटी होता है ~~

*मौसम जब कभी पंचवटी होता हैबिस्तर क्यूँ इतना सलवटी होता है*जहाँ दम तोड़ती हैं डूबकर फितरतेंवो तो जज़्बात का तलहटी होता है*जब कभी तुम्हें आस-पास पाता हैबावरा मन बेबजह ही नटी होता है*क्या दूं तुम्हें, दिल के सिवा बोलोहर सामान यहाँ तो बनावटी होता है*सजने को
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माँ एहसास है --

माँ एक शब्द नहीं एहसास है एक अटूट रिश्ता; एक विश्वास है कभी देखना गौर से बच्चे के लिये स्वेटर बुनते हुए उसे ऊन को जब वह तीलियो से उलझाती है अपने मन की अनगिनत गांठ खोलती है; सुलझाती है लोरियां गाती है सारी रात नहीं सोती है पर बच्चे की पलकों पर सपन बोत
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प्यार तो बस एक अनुभूति है-आलेख

प्यार एक अनुभूति जिसे व्यक्त करने से अधिक उसे हृदय में सृजित करने की आवश्यकता है। अपने मुख से शब्दों में व्यक्त करना या फिर चूमना प्यार के अभिव्यक्त रूप हैं पर करने वाला उससे लाभ कितना ले पाता है इस पर विचार करना चाहिये। कई बार तो उसे हानि भी होती है
 
दीपक भारतदीप
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अनुभूति के कवि : देखिए आप भी सूचीकृत हैं क्या...?

पूर्णिमा जी एवं उनके सहयोगियों ने अंतरजाल पर हिन्दी के पाठक समुदाय एवं कविगण को भरपूर सहयोग दिया है - आज उनके इस नि : स्वार्थ हिन्दी सेवी भाव को क्यों न सराहा जाए । विकी पर भी उनका लगातार लेखन आग्रह सच कितना अपनत्व भरा प्रतीत होता है किंतु कोई सहभागि
 
"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा "