अंगूर का अनार
कुछ बच्चियों ने मिलकर बनाया एक ब्लाग- http://paripoems।blogspot.com/ यह कविता वहीं से ली गई है। आप भी अपनी पिटारी खोलें और कवितायें भेजें gonujha.jha@gmail.com पर । बात है यह बहुत पुरानी खा रही थी अंगूर एक रानी बीज उसके गले में फंसता यह देख कर भाई उसका
Aug 17 2009 03:32 PM



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