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कबीर के श्लोक - ८

कबीर संतन की झुंगीआ भली,भठि कुसती गाउ॥ आगि लगऊ तिह धउलहर,जिह नाही हरि को नाउ॥१५॥ इस श्लोक मे कबीर जी अपने निजि विचार व्यक्त कर रहे हैं कि यदि कोई संत है, परमात्मा का प्यारा है।ऐसे संत की छोटी सी झोपड़ी भी मुझे भली दिखती है,अच्छी दिखती है। जबकि बुरे इन्सान
 
परमजीत बाली
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जिज्ञासा

अपने अधूरेपन की तलाश मुझे यात्रा पर ले जाती है। जहाँ वह मुझे अन्जान रास्तो पर अंन्जान लोगो के बीच बहुत खेल खिलाती है। मेरा तमाशा बनाती है। लेकिन मेरी हताशा देख कर कोई आवाज मुझे बुलाती है मुझे समझाती है- इस जिज्ञासा को जलाए रखे अपने भीतर। देर सबेर रास्ता
 
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कबीर के श्लोक - ७

कबीर दीनु गवाइआ दुनी सिउ,दुनी न चाली साथि॥ पाइ कुहाड़ा मारिआ, गाफिल अपनै हाथि॥१३॥ कबीर जी इस श्लोक मे कहते है कि हम सदा दुनिया दारी में ही लगे रहते है,जिस कारण हम जिस काम के लिए दुनिया मे आए हैं,वही भूल जाते हैं और दुनिया दारी में ही रम जाते हैं।जबकि हम
 
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कबीर के श्लोक - ५

कबीर सोई मारीऐ,जिह मूऐ सुखु होइ॥भले भले सभु को कहै,बुरे न मानै कोइ॥९॥कबीर जी इस श्लोक मे कहते है कि हमे उसे मारना चाहिए जिस के मरने से हमे सुख की प्राप्ती होती है।जिस के मरने पर सभी लोग भला मानते है और उस के हमारे द्वारा मारे जाने पर हमे कोई बुरा भी नही
 
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कबीर के श्लोक -४

कबीर सब ते हम बुरे,हम तजि भले सभु कोए॥जिनि ऐसा करि बूझिआ,मीतु हमारा सोए॥७॥इस श्लोक में कबीर जी कहते है कि सब से बुरे हम ही होते है,हमे छोड़ कर बाकि सभी तो भले ही हैं।जब यह बात समझ मे आती है,उस समय वह सभी लोग अपने लगने लगते है जो इस प्रकार जान जाते
 
परमजीत बाली
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कबीर के श्लोक -३

कबीर ऐसा एक आधु,जो जीवत मिरतकु होइ॥निरभै होइ के गुन रवै,जत पेखऊ तत सोइ॥५॥कबीर जी कहते है कि इस संसार मे कोई बिरला ही होता है जो अपने जीवन को इस तरह जीए जैसे कोई जीवत व्यक्ति किसी मरे हुए के समान इस संसार से संबध रखता है।निरभय हो कर सुख और दुख से ऊपर
 
परमजीत बाली
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कबीर के श्लोक -२

कबीर डगमग किआ करहि,कहा ढुलावहि जीउ॥सरब सूख के नाइको,राम नाम रसु पीउ॥३॥कबीर जी कहते है कि हे प्राणी तू अपने मन को किन बातों मे उलझा रहा है,क्यो तू क्षणिक सुखो मे लग कर अपने मन को बहला रहा है। तुझे तो उस परमपिता परमेश्वर जो कि सभी सुखो का स्वामी है, सभ
 
परमजीत बाली
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यह अंधविश्वास नही है.....

गुगुल से साभार) भूत होते हैं.... कोई भी विश्वास बिना कारण नही बनता।यदि ऐसा होता है तो संभव है वह विश्वास कभी ना कभी कमजोर साबित हो ही जाएगा। जब आप बीमार होते हैं तो किसी चिकित्सक को खोजते हैं ... आप को जो ठीक कर देता है वही योग्य चिकित्सक हो जाता है।
 
परमजीत बाली