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साईं की नज़र-ए-कर्म

शायद आपको याद होगा कि कुछ ही समय पूर्व मैंने एक पोस्ट में चर्चा की थी एक नयी संगीत एल्बम साईं तुमको नमन की. इसका ज़िक्र मैंने ऐसे लागी लगन में भी किया था. संगीत की दुनिया में अध्यात्मिक रंग जमा रहे नरेश कुमार ने इस पर बहुत मेहनत भी की. अब वह दिन आ
 
Rector Kathuria
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कैसे फिर आये खुशहाली

अजीब और दुखद सत्य है कि जहां देवी के 9 रूपों की पूजा होती है वहां आज भी भ्रूण हत्या का कलंक मौजूद है, वहां दहेज हत्या की  खबरें आज भी आये दिन देखनी पड़ती हैं, वहां कन्या का जन्म आज भी चिंता का विषय बना हुआ है. यह सब होता देख कर भी मूक दर्शक बने
 
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ऐसे लागी लगन

उन दिनों मैं अमृतसर में था. अपनी बुआ के घर में रह रहा था. वहीँ पास ही एक बहुत ही अच्छे परिवार में एक लड़की भी थी जो गाती भी बहुत अच्छा थी और पढाई लिखाई में भी काफी तेज़ थी. उसके चेहरे पर एक दिव्यता सी थी. उस किशोर उम्र में
 
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साईं तुम को नमन

हम किसी को क्षमा करें या माफ़ करें बात एक ही है. अलग से दिखने वाले इन दो शब्दों में  जो एक और बात  है वह यह है कि इन दोनों में ही मा शब्द का सदउपयोग हुआ है जिसे सुनने के बाद मां की याद आती
 
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