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साइकिल वाले को कितनी जगह देते हैं आप?

आजकल देखा जा रहा है कि बड़े शहरों में साइकिल चलाने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है! प्रसंगवश हमारे बरगद के पेड़ के नीचे भी आज यही चर्चा हो रही है! संतोष हड़बडाते हुए अपनी गाडी खड़ी कर सुभाष और देव से हाथ मिलाते हुए कहता है, "यार, यह साइकिल वाले
 
पुनीत बिंद्लिश
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हिन्दू धर्म दर्शन-पति पत्नी में झगड़ा न करायें

मद्यपापनं कलहं पुगवैरं भार्यापत्योरंतरं ज्ञातिभेदम्। राजद्विष्टं स्त्रीपुंसयोर्विवादं वज्र्यान्याहुवैश्चं पन्थाः प्रदुष्टः।। हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर कहते हैं कि शराब पीना, कलह करना, अपने समूह के साथ शत्रुता, पति पत्नी और परिवार में भेद
 
दीपक भारतदीप
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हिन्दू धर्म संदेश-नीच स्वभाव होने पर ऊंचे कुल का सम्मान नहीं मिलता

य ईर्षुः परवित्तेषु रूपे वीर्य कुलान्वये। सुखभौभाग्यसत्कारे तस्य व्याधिनन्तकः।। हिंदी में भावार्थ-जो दूसरे का धन, सौंदर्य, शक्ति और प्रतिष्ठा से ईर्ष्या करता है उसकी व्याधि की कोई औषधि नहीं है। न कुलं वृत्तही प्रमाणमिति मे मतिः। अन्तेध्वपि हि जातानां
 
दीपक भारतदीप
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ईर्ष्या जैसी व्याधि की कोई दवा नहीं

य ईर्षुः परवित्तेषु रूपे वीर्य कुलान्वये। सुखभौभाग्यसत्कारे तस्य व्याधिनन्तकः।। हिंदी में भावार्थ-जो दूसरे का धन, सौंदर्य, शक्ति और प्रतिष्ठा से ईर्ष्या करता है उसकी व्याधि की कोई औषधि नहीं है। न कुलं वृत्तही प्रमाणमिति मे मतिः। अन्तेध्वपि हि जातानां
 
दीपक भारतदीप
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संत कबीर के दोहे-जहां विवाद होते हों, वहां न जायें

कबीर न तहां न जाइये, जहां जु नाना भाव। लागे ही फल ढहि पड़े, वाजै कोई कुबाव।। संत शिरोमणि कबीरदास का कहना है कि वह कभी न जायें जहां नाना प्रकार के भाव हों। ऐसे लोगों से संपर्क न कर रखें जिनका कोई एक मत नहीं है। उनके संपर्क से के दुष्प्रभाव से हवा के एक
 
दीपक भारतदीप
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पश्येम शरदः शतम् … – अथर्ववेद की प्रार्थना

वेदों में जहां एक ओर कर्मकांडों से जुड़े मंत्रों और लौकिक उपयोग की बातों का उल्लेख मिलता है, वहीं दूसरी ओर आध्यात्मिक दर्शन से संबद्ध मंत्र एवं अदृश्य शक्तियों की प्रार्थनाएं भी उनमें देखने को मिलती हैं । मैंने अभी पूरा अथर्ववेद नहीं देखा है, किंतु जितना
 
योगेन्द्र जोशी
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चाणक्य नीति शास्त्र-हृदय में शुद्धता में निहित है धर्म का भाव

वाचः शौचं च मनसः शौचन्द्रियनिग्रहः। सर्वभूति दया शौचं एतच्छौत्रं पराऽर्थिनाम्।। हिंदी में भावार्थ-वाणी की पवित्रता, मन की स्वच्छता, इंन्द्रियों पर नियंत्रण, समस्त जीवों पर दया और भौतिक साधनों की शुद्धता ही वास्तव में धर्म है। पुष्पे गंधं तिले तैलं
 
दीपक भारतदीप
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कौटिल्य दर्शन-अपनी गलत आदतों की उपेक्षा न करें

प्रकृतिव्यवसननि भूतिकामः समुपेक्षेत नहि प्रमाददर्पात्। प्रकृत्तिवयवसनान्यूपेक्षते यो न चिरात्तं रिपवःपराभवन्ति।। हिंदी में भावार्थ-विभूति की इच्छा से उत्पन्न प्रमाद या अहंकार की प्रकृत्ति से उत्पन्न व्यसनों की उपेक्षा न करें। प्रकृत्ति के व्यसनों की
 
दीपक भारतदीप
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यावत् जीवेत् सुखं जीवेत् …: चार्वाक दर्शन (लोकायत)

मानव जीवन का सबसे प्राचीन दर्शन (philosophy of life) कदाचित् चार्वाक दर्शन है, जिसे लोकायत या लोकायतिक दर्शन भी कहते हैं । लोकायत का शाब्दिक अर्थ है ‘जो मत लोगों के बीच व्याप्त है, जो विचार जनसामान्य में प्रचलित है ।’ इस जीवन-दर्शन का सार निम्नलिखित
 
योगेन्द्र जोशी
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कठोपनिषद् के नीति वचन – श्रेयस् (कल्याणप्रद) एवं प्रेयस् (चित्ताकर्षक) में चुनाव

कठोपनिषद् में ऋषिकुमार बालक नचिकेता और यम देवता के बीच प्रश्नोत्तरों की कथा का वर्णन है । नचिकेता की शंकाओं का समाधान करते हुए यम उपदेश देते हैं कि मनुष्य दो प्रकार के कर्मों से बंधा रहता है, प्रथम वे जो कल्याणकारी होते हैं और द्वितीय वे जो उसको प्रि
 
योगेन्द्र जोशी
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बुद्धवचनामृत, अश्वघोषविरचित बुद्धचरितम् से – ऐहिक संबंधों का अस्थायित्व

प्राचीन संस्कृत साहित्य में ‘बुद्धचरितम्’ नामक एक काव्य उपलब्ध है । मेरे पास इसकी एक प्रति है, श्री सूर्यनारायण चौधरी द्वारा संपादित-अनुवादित एवं मोतीलाल बनारसीदास द्वारा प्रकाशित । ग्रंथ-परिचय में बताया गया है कि काव्य की पूरी मूल प्रति उपलब्ध नहीं है ।
 
योगेन्द्र जोशी