पसंद करें
4
नापसंद करें

पागल दोनों तरफ हैं

हफ़ीज़ चाचड़शनिवार 29 मई को कराची प्रेस क्लब गया तो वहाँ मेरे कुछ पत्रकार मित्र हिंदी और उर्दू भाषा के बीच हुए विवाद पर चर्चा कर रहे थे. मैंने कहीं पढ़ा था कि अमरीका में हिंदी पढ़ाने वाले एक अध्यापक घूमते घूमते दिल्ली से सड़क के रास्ते लाहौर पहुँच गए
पसंद करें
6
नापसंद करें

फिल्म राजनीति की समीक्षा, भावना सोमाया की कलम से

राजनीति के विषय को लेकर हमारे यहाँ बहुत सारी फिल्में बनी हैं. कुछ घरेलू राजनीति के बारे में हैं जैसे खानदान,अपने-पराए या संसार …. कुछ जुर्म की राजनीति पर जैसे कंपनी या सरकार...कुछ प्यार की राजनीति पर जैसे देवर, गाईड या अजब प्रेम की ग़ज़ब कहानी…या फिर
पसंद करें
3
नापसंद करें

एक इंसान ऐसा चाहिए : मनोज सिंह

एक इंसान ऐसा चाहिए : मनोज सिंह  रिश्तों में कुछ सीधी सरल सी उलझनें होनी चाहिएआदमी को जीना है गर तो एक अदद दुश्मन चाहिएमजा होश से जीने में है जानता हूँ मैं यह बातपर कभी साकी मिले तो दो घूंट पीनी चाहिएरहमत है उसकी जिन्दगी बख्सी उसनेकबूल मेरे दिल को यह
पसंद करें
1
नापसंद करें

युवा कवि नितिन फलटणकर की रचना-रास्ते

:-नितिन फलटणकरमैं उजाला बन चला था,रास्तों को नापने।आह! अचानक आंधी आई।मैं बुझ गया गुमनाम बनकर।लोग ढूँढते रहते मुझे, मैं उनका साया बन गया।और बस वो चल दिए, फिर खुला आसमान बनकर।यह मुझे मालूम न था,के जिंदगी अपनी नहीं।मैं तो आंधी से लड़ रहा था,मामूली इन्सान
पसंद करें
2
नापसंद करें

युवा कवि नितिन फलटणकर की "त्रिशूल"

त्रिशूल-नितिन फलटणकर ऑंख में भूख थी, और हाथ में बंदूक थी।साथ उसके विनाश था, और कांपती किसी की रूह थी।वो लड़ रहा था, अपने आपसे।न्याय के वासते।न्याय की छांव भी धूप से तेज थी।छोड़ आया था वह खून के रिश्ते।खून के लिए उसके हाथ में मौत थी। उसे न पता था, वह कर रहा
पसंद करें
6
नापसंद करें

मेरे दिल की बात - शिवम् मिश्रा

मेरे दिल की बात - शिवम् मिश्रा जो मरे कोई "नेता" तो रोते है हजारो,झुकते है "झंडे" और "सिर" भी |न होती कोई आँख नम,न पड़ता फर्क किसी को,जवान बेटे , भाई होते शहीद ,जब जब गिरते 'मिग', फटते बम मेरे देश में ..... |रोता है दिल ,रोता हूँ मैं भी ....क्यों है
पसंद करें
3
नापसंद करें

युवा कवि नितिन फलटणकर की रचना-दिल्ली

दिल्ली तो बस डूब रही है छोटे-छोटे गलियारों में।सत्ता के संघर्षों में और नेता के ललकारों में।इस बिंदी की लाली, अब धीरे-धीरे उतर रही है।अपनों की ही मौंतों से दिल्ली, सुलग-सुलग कर जल रही है।अब रास्ते भी दिल्ली के कुछ सूने सूने लगते हैं।जिनको हम आदर्श मानते,
पसंद करें
4
नापसंद करें

तो के चक्कर में तोता

मेरे पड़ोस में मेरा एक मित्र रहने आया है, जिस घर में वो रहने आया, वहाँ एक पालतू तोता भी है, जो पिंजरे में बंद रहता है, पालतू पंछियों की तरह। उसको कैद में देखकर मित्र ने अपने मकान मालिक से कहा, "इसको आजाद क्यों नहीं कर देते?"। उसने आगे से जवाब दिया,
पसंद करें
3
नापसंद करें

कैसे कहूँ कि माँ तेरी याद नहीं आती

म्ममानौ मई को माँ दिवस है, इस शुभ अवसर पर अलग अलग रचनाकारों द्वारा लिखी गई माँ से सम्बंधित काव्य रचनाओं को आपके समक्ष पेश करने का युवा सोच युवा खयालात की ओर से यह एक छोटा सा प्रयास है। इस प्रयास को आपकी ओर से मिल रहा प्यार मेरे हौसले को और बढ़ाता है। निदा
पसंद करें
6
नापसंद करें

माँ याद आई व बरसात : समीर लाल "समीर"

नौ मई को माँ दिवस है, इस शुभ अवसर पर अलग अलग रचनाकारों द्वारा लिखी गई माँ से सम्बंधित काव्य रचनाओं को आपके समक्ष पेश करने का युवा सोच युवा खयालात की ओर से यह एक छोटा सा प्रयास है। इस प्रयास को आपकी ओर से मिल रहा प्यार मेरे हौसले को और बढ़ाता है। निदा
पसंद करें
3
नापसंद करें

सोनू उपाध्याय की रचना - माँ

नौ मई को माँ दिवस है, इस शुभ अवसर पर अलग अलग रचनाकारों द्वारा लिखी गई माँ से सम्बंधित काव्य रचनाओं को आपके समक्ष पेश करने का युवा सोच युवा खयालात की ओर से यह एक छोटा सा प्रयास है। इस प्रयास को आपकी ओर से मिल रहा प्यार मेरे हौसले को और बढ़ाता है। निदा
पसंद करें
4
नापसंद करें

आलोक श्रीवास्तव की रचना-अम्मा

नौ मई को माँ दिवस है, इस शुभ अवसर पर अलग अलग रचनाकारों द्वारा लिखी गई माँ से सम्बंधित काव्य रचनाओं को आपके समक्ष पेश करने का युवा सोच युवा खयालात की ओर से यह एक छोटा सा प्रयास है। इस प्रयास को आपकी ओर से मिल रहा प्यार मेरे हौसले को और बढ़ाता है। निदा
पसंद करें
2
नापसंद करें

चार दीवार-इक देहरी माँ - सुधीर आज़ाद

नौ मई को माँ दिवस है, इस शुभ अवसर पर अलग अलग रचनाकारों द्वारा लिखी गई माँ से सम्बंधित काव्य रचनाओं को आपके समक्ष पेश करने का युवा सोच युवा खयालात की ओर से यह एक छोटा सा प्रयास है। इस प्रयास को आपकी ओर से मिल रहा प्यार मेरे हौसले को और बढ़ाता है। निदा
पसंद करें
5
नापसंद करें

खट्टी चटनी जैसी माँ।-निदा फाज़ली

आगामी नौ मई को माँ दिवस है, इस विशेष अवसर पर युवा सोच युवा खयालात लेकर आया है निदा फाज़ली की एक नज्म। और कल पढ़े सुधीर आजाद की माँ पर लिखी एक अद्भुत नज्म। बेसन की सौंधी रोटी पर, खट्टी चटनी जैसी माँ।याद आती है चौका बासन,चिमटा फूँकनी जैसी माँ।बाँस की खुर्री
पसंद करें
1
नापसंद करें

दार्शनिक संगीतज्ञ का फकीराना ठाठ

अनिल त्रिवेदी, इंदौर की कलम से।पुराना झीना-झीना कुर्ता, मटमैली लुंगी और बेतरतीब ब़ढ़ी हुई दा़ढ़ी। देखने पर सहसा विश्वास नहीं होता कि हम स्वनामधन्य शास्त्रीय गायक कुमार गंधर्व के सुपुत्र मुकुल शिवपुत्र से रूबरू हैं। इस दार्शनिक संगीतज्ञ का यही निराला
पसंद करें
5
नापसंद करें

कौन कहता है मदर टरेसा नहीं रही

लेखिका : इंदु पुरी गोस्वामी  आज फिर कुछ लिखने के मूड में हूँ, भई मैं ठहरी बड़ी मूडी औरत इच्छा हुई तो लिख दिया नहीं हुई तो एक महीने तक की-बोर्ड को टच ही नही करना, इससे पहले कि मूड बदल जाये सोच रही हूँ क्यों ना थोडा बहुत और पका ही लिया जाये आप लोगों
पसंद करें
4
नापसंद करें

क्यों मुझे तेरा इंतजार रहता है : संजय भास्कर

जहाँ प्रेम में अलगाव प्रलय लाता है, वहीं कुछ समय का बिछोह प्रेम को नई लय दे जाता है। बिछोह दौरान प्रेमी के मन में जहाँ प्रेमी के प्रति स्नेह उमड़ता है, वहीं दुनिया भर की बातें सुन सुन कभी कभी एक अनजाना सा डर भी पनपने लगता है। कहीं वो हमें भूल तो नहीं गया,
पसंद करें
3
नापसंद करें

एक था बचपन

ब्लॉग अतिथि : भूतनाथएक था बचपन !!बड़ा ही शरारती,बड़ा ही नटखट !!वो इतना भोला था किहर इक बात पर हो जाता था हैरानबन्दर के चिचियाने से,तितली के उड़ने सेमेंढक के उछलने से,चिड़िया के फुदकने से !!वो बड़ो को बार-बार करता था डिस्टर्ब.....काम तो कुछ करता ही नहीं
पसंद करें
5
नापसंद करें

फतवा, जिसने मचा दी खलबली

साऊदी अर्बिया कवित्री हिस्सा हिलाल को एक टैलीविजन साऊदी अर्बिया टेलीविजन द्वारा प्रसारित काव्य प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल हुआ, लेकिन इस प्रतियोगिता के दौरान उस द्वारा पढ़ी गई कविता 'फतवा' ने चरमपंथियों के दिमाग खराब कर दिए, मसलन उन्होंने हिस्सा
पसंद करें
7
नापसंद करें

जिन्दगी एक कविता...गम जिसका शीर्षक है : महफूज अली

ब्लॉगर जगत को गर्व होना चाहिए महफूज अली जैसे हीरे पर, और उनसे प्रेरणा लेते हुए सार्थक ब्लॉगिंग की तरफ अपने कदम बढ़ाने चाहिए। अगर कोई कहे कि ब्लॉगर जगत तो कोले की खान है, तो मैं कहूँगा महफूज अली जैसे हीरे भी यहीं से पैदा होते हैं। अगर कोले की खानें बंद हो
पसंद करें
3
नापसंद करें

सच तुम्हारे साथ फिर बचपन जिया

रुपाली बर्वे की कलम से कुछ :- सहेली सतमीत कौर को समर्पितवो हमारा बतियानाएक साथ कई किस्से सुनानाबीच-बीच में हँसना-हँसानाफिर कहना अभी तो सुनाना शुरू कियासच तुम्हारे साथ फिर बचपन जियाचलते चलते यूं ही किसी की खिल्ली उड़ानासबको नए नाम देकर मनगढ़ंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

नई मंजिल की ओर..

रचनाकार-संजय भास्कर कहीं ऐसा तो नहीं किहम इस दुर्लभ जीवन के अनमोल क्षणों को गंवा रहे हैं दुनिया की चकाचौंध मेंतो क्यों न हम, स्वयं में झांके और देखें हम हैं कितने पानी मेंकहीं ऐसा तो नहीं कि हम अटक गए हैं आलस्य में, प्रमाद में और भूल बैठे हैं अपने
पसंद करें
4
नापसंद करें

भारतीय की जान की कीमत

(बाल-बुद्धि भारतियों पर कवि का कटाक्ष)अरे - समझौता गाड़ी की मौतों पर - क्या आंसू बहाना था उनको तो - पाकिस्तान नाम के जहन्नुम में ही - जाना था मरने ही जा रहे थे - लाहौर, करांची - या पेशावर में मरते और उनके मरने पर - ये नेता - हमारा पैसा तो ना खर्च करते और
पसंद करें
0
नापसंद करें

भारतीय की जान की कीमत

(बाल-बुद्धि भारतियों पर कवि का कटाक्ष)अरे - समझौता गाड़ी की मौतों पर - क्या आंसू बहाना था उनको तो - पाकिस्तान नाम के जहन्नुम में ही - जाना था मरने ही जा रहे थे - लाहौर, करांची - या पेशावर में मरते और उनके मरने पर - ये नेता - हमारा पैसा तो ना खर्च करते और
पसंद करें
0
नापसंद करें

तुम्हारी हत्या पर भी रख लेंगे २ मिनट का मौन

(अभागे भारतीय की फरियाद पर सिक-यू-लायर (Sick you Liar, बीमार मानसिकता वाले झूठे) नेता द्वारा सांत्वना भरे कुटिल उपदेश की तरह पढ़ें)अच्छा!!!   वो दुश्मन है? बम फोड़ता है? गोली मारता है?मगर सुन - दोस्ती में - इतना तो सहना ही पड़ता हैतय है - जरुर
पसंद करें
1
नापसंद करें

तुम्हारी हत्या पर भी रख लेंगे २ मिनट का मौन

(अभागे भारतीय की फरियाद पर सिक-यू-लायर (Sick you Liar, बीमार मानसिकता वाले झूठे) नेता द्वारा सांत्वना भरे कुटिल उपदेश की तरह पढ़ें)अच्छा!!!   वो दुश्मन है? बम फोड़ता है? गोली मारता है?मगर सुन - दोस्ती में - इतना तो सहना ही पड़ता हैतय है - जरुर
पसंद करें
0
नापसंद करें

नूर की बूँदें

एक खूबसूरत गाने की पंक्तियाँ है जो मुझे दिल की गहराई से ,दिल की गहराई तक पसंद है 'कहीं तो ये दिल कहीं मिल नही पाते,कहीं से निकल आये जन्मों के नाते ' और........ 'सिर्फ अहसास है ये रूह से महसूस करो प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो 'नूर की इस बूँद को
पसंद करें
2
नापसंद करें

नूर की बूँदें

एक खूबसूरत गाने की पंक्तियाँ है जो मुझे दिल की गहराई से ,दिल की गहराई तक पसंद है 'कहीं तो ये दिल कहीं मिल नही पाते,कहीं से निकल आये जन्मों के नाते ' और........ 'सिर्फ अहसास है ये रूह से महसूस करो प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो 'नूर की इस बूँद को
पसंद करें
0
नापसंद करें

वो रोज मरती रही

#fullpost{display:none;}कर कर सवाल खुद सेवो रोज मरती रही,अपने दर्द कोशब्दों के बर्तन भरती रही,कुछ लोग आएकहकर कलाकारी चले गएऔर वो बूंद बूंद बनबर्तन के इस पार झरती रही।खुशियाँ खड़ी थी दो कदम दूर,लेकिन दर्द के पर्दे ने आँखें खुलने न दीवो मंजिल के पास पहुंच
 
वृंदा
पसंद करें
0
नापसंद करें

दो गज़ जमीं भी न मिली...

छोटी छोटी झाड़ियाँ या डंडे गाढ़ने वालों ने तब सोचा भी न होगा कि समद्र के किनारे बनी छोटी छोटी मछेरों की बस्तियाँ समय पाकर कस्बों से नगरों और फिर नगरों से महानगरों में तब्दील हो जाएंगी, जहाँ बहुत तेजी से बढ़ती आबादी के लिए गगन छूती बहु-मंजिला इमारतें बनानी
पसंद करें
0
नापसंद करें

दो गज़ जमीं भी न मिली...

छोटी छोटी झाड़ियाँ या डंडे गाढ़ने वालों ने तब सोचा भी न होगा कि समद्र के किनारे बनी छोटी छोटी मछेरों की बस्तियाँ समय पाकर कस्बों से नगरों और फिर नगरों से महानगरों में तब्दील हो जाएंगी, जहाँ बहुत तेजी से बढ़ती आबादी के लिए गगन छूती बहु-मंजिला इमारतें बनानी
पसंद करें
0
नापसंद करें

क्या हो पाएगा महा-मानव का जन्म?

हाल में ही ओशो की एक किताब में यह कहानी पढ़ी थी कि एक बार किसी गाँव में एक पादरी को चर्च के भीतर प्रेम पर एक भाषण देना था। उसने उसके लिए पूरी तैयारी भी कर ली थी। कई पुस्तकों का अध्ययन भी कर लिया था और अब वो प्रेम पर भाषण देने के लिए घर से निकला। चर्च से
पसंद करें
0
नापसंद करें

बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी

चाहे हम हों कितने तगड़े , मुंह वो हमारा धूल में रगड़े,पटक पटक के हमको मारे , फाड़ दिए हैं कपड़े सारे ,माना की वो नीच बहुत है , माना वो है अत्याचारी ,लेकिन - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .जब भी उसके मन में आये , जबरन वो
पसंद करें
2
नापसंद करें

रजनी ग़र तुम न होती

रजनी ग़र तुम न होती तो क्या होतान खिलते कमल, कुमुदिनी का क्या होताकमलनयन की उपमा कौन कवि देतासभी होतीं गज़ाला सुनयना कौन होताकितने ही शब्दों के मायने ग़ुम हो जातेअनगिनत शब्द, शब्दकोश से मिट जातेअमावस की रात कभी ज़िंदगी में न आतीमोगरा, रातरानी की ख़ुशबू
पसंद करें
5
नापसंद करें

वो धूप से डरती है, मैं सपनों से डरता हूँ

उसका आना कितना सुकून देता हैउसके जाने से उदासी सी छा जाती है क्या वह सचमुच चली जाएगी, मेरे दिल से, दिमाग से या सपनों सेक्यों आते हैं सपने उसके जाने के    तो क्या अब मैं हमेशा जागता ही रहूँगा.....इस डर से कि कहीं सपने न आ जाएँउसके जाने के,
पसंद करें
5
नापसंद करें

एक छत्त के तले एक छोटा सा भारत

हिन्दी दिवस बीत गया। देशभर में रस्म अदायगी भी हो गई। विभिन्न विभागों ने हिन्दी सप्ताह मना लिया। सरकारी दफ्तरों में सूचना पट्ट पर पुराने नेताओं, साहित्यकारों ये विदेशी विद्वानों के हिन्दी के बारे में वक्तव्य लिखे गए। बैंकों में लिखा 'हिन्दी में चेक
पसंद करें
2
नापसंद करें

'द डे ऑफ्टर टुमारो' हो सकती है सत्य

पांच साल पहले हालीवुड में बनी फिल्म 'द डे आफ्टर टुमारो' आने वाले दो सालों में हकीकत में बदल सकती है! फिल्म में धरती देखते देखते कुछ हफ्तों में बर्फ की मोटी चादर से ढंग जाती है। भले ही इस वक्त दुनिया भर के देशों में ग्लोबल वार्मिग का मुद्दा गरमाया है
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
5
नापसंद करें

बाबरी मस्जिद कांड और वेद प्रताप वैदिक

नरसिंह राव पर मस्जिद तुड़वाने का आरोप वैसा ही है, जैसा यह कहना कि न्यूयॉर्क के ट्रेड टॉवर अमेरिका के यहूदियों ने गिरवाए या बेनजीर भुट्टो की हत्या आसिफ अली जरदारी ने करवाई! अफसोस इस बात का है कि ऐसी बेसिरपैर की बातों को कांग्रेस के कुछ जिम्मेदार नेताओ
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
4
नापसंद करें

शहीद-ए-आजम के अंतिम पल

भगत सिंह होते तो इस महीने की 27 तारीख को 102 साल के हो गए होते। मगर उन्होंने शहीद होने का रास्ता खुद चुना था। यह बात अलग है कि ब्रिटिश सरकार उनसे इतनी नफरत करती थी कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखेदव को फांसी तो दी गई मगर मरने से पहले ही फंदे से उतार लिया
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
4
नापसंद करें

शांत सुकरात, और अशांत पत्नी

यूनान के महान दार्शनिक सुकरात बहुसंख्यक लोगों के आदर व श्रद्धा के पात्र थे। वे जहां भी जाते, लोग उन्हें घेरकर खड़े हो जाते और अपनी अनेक जिज्ञासाएं उनके समक्ष रखते। सुकरात अत्यंत शांतिपूर्वक सभी का समाधान करते। कभी-कभी ऐसा भी होता था कि इतने लोगों के
 
कुलवंत हैप्पी