धर्म की नितांत दार्शनिक व्याख्या क्यूं।
अजीत कुमारधर्म को लेकर अपने अपने समय में दार्शनिकों की घोषणाएं चाहे जो भी रही हो। व्यवहारिकता के धरातल पर धर्म की अपरिहार्यता समाज में पहले भी थी और आगे भी रहेगी। ईश्वर को मृत मानने की नीत्शे की घोषणा से लेकर विचार और इतिहास के अंत तक की कई घोषणाएं की जा
Feb 05 2010 05:57 PM



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