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ख़ामोशी

ख़ामोशी को सुनकर देखो , इसकी भी जुबान होती है लम्हा लम्हा तनहा - सी , जाने कब कहाँ होती है ख़ामोशी के आँगन में , तन्हैयाँ जवान होती है , तन्हाइयों के साए में , सारी खुशियाँ फंना होती है , ख़ामोशी लगती सपने सी , आती है और जाती है , पीर रहती है जब तक ये ,