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विदापत नाच को जिंदा रखने वाले ठिठर मंडल नहीं रहे

कथाशिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु से जुड़ी स्वर्णिम याद के रुप में विदापत नाच मंडली अब इतिहास बन गई है। रेणु की यह नृत्य व गीत परंपरा पहले ही लगभग लुप्त हो चुकी थी लेकिन अब इसके अंतिम चिराग के रुप में शेष बचे कलाकार ठिठर मंडल भी नही रहे। मंडल अब तक कोसी के
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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कोसी की जनता पानी के नाम पर जहर पी रही है..

यह रपट जागरण डॉट कॉम से साभार है। जब इसे पढ़ रहा था तो पूर्णिया से जुड़ी मैथिली की एक कहावत याद आ गई- जहर नै खाउ, माहूर ने खाउ, मरबाक होए तो पूर्णिया आउ। इसका अर्थ यह है कि यदि आपको मरना है तो न जहर खाइए और न ही माहूर खाइए, बस पूर्णिया आ जाइए।हालांकि हम
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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बदलाव यूं ही नहीं होता है, इसके लिए प्रयास किए जाते हैं

देर आए दुरूस्त आए, ये कहावत अब बिहार के कुछ इलाकों में सटीक साबित हो रही है। बदहाल और धूल उड़ाती सड़कों के स्थान पर चमचमाती सड़कों पर दौड़ती गाड़ियां इस बात का सूचक है कि बदलाव हो रहे हैं, दरअसल इसके लिए प्रयास हो रहे हैं। जिन सड़कों पर चलने में एक भ
 
गिरीन्द्र नाथ झा