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Macaulay’s Education Policy – ‘Create a class of people …’ कथ्य कुछ और भी है!

{1} “हमारे तथा जिन पर हमारा शासन है ऐसे लाखों-करोड़ों जनों के बीच दूभाषिए का कार्य करने में समर्थ एक वर्ग तैयार करने के लिए हमें भरपूर कोशिश करनी है; उन लोगों का वर्ग जो खून एवं रंग/वर्ण में भारतीय हों, लेकिन रुचियों, धारणाओं, शब्दों एवं बुद्धि/विद्वत्ता
 
योगेन्द्र जोशी
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'मैं किसी कीमत पर हिंदी नहीं बोलूंगी'

बात 4 साल पहले की है। इंडिया हैबिटेट सेंटर में एक पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन होनेवाला था। चूंकि चित्रकार कोई खास नामी नहीं थीं, इसलिए उन्होंने शायद सोचा होगा, क्यों न किसी फिल्मी हस्ती से ही इसका उद्घाटन कराया जाए। उन्होंने प्रदर्शनी का उद्घाटन कराने
 
प्रेमचंद्र गुप्ता
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हर मर्ज की एक दवा है, काहे न आजमाएं….

हम भारतीयों के पास विकास का एक ऐसा ही एक सरलीकृत मंत्र है, जो हमें विकसीत देश बना देगा. यह मंत्र मानसिक रूप से हम पर इतना हावी है कि इसके बिना भारत कभी जापान-फ्रांस-जर्मनी जैसा विकसीत बन सकता है, ऐसा कहने वाले को मूर्ख ही कहा जाएगा.
 
संजय बेंगाणी
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आप समझते क्यों नहीं? हिन्दी राष्ट्रभाषा नहीं है…

दिन भर राष्ट्रभाषा के अपमान की धुन बजती रही. एक पूरी फौज है जिसके सीने पर साँप लौट गए. प्रतिक्रिया करने वाले भी पत्रकार बिरादरी के ही लोग है, जिन्हे बुद्धिजीवी भी कहा जाता है.
 
संजय बेंगाणी
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14 सितंबर, हिंदी दिवस – रस्मअदायगी का एक दिन, हर बीते वर्ष की भांति

आज हिंदी दिवस है, 14 सितंबर । सर्वप्रथम मैं हिंदी-प्रमियों के प्रति अपनी शुभकामना व्यक्त करता हूं कि उनका भारतीय भाषाओं के प्रति लगाव बना रहे और यह भी कि वे अपने भाषाई प्रयासों में सफल होवें । तारीख के हिसाब से कोई 60 साल पहले आज ही के दिन देश में
 
योगेन्द्र जोशी
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इंग्लिश, स्पेलिङ्, प्रोनंसिएशन – वर्तनी एवं उच्चारण में असंदिग्ध संबंध का अभाव

(3 अगस्त 2009 की पोस्ट के आगे) पिछली बार मैंने VOGUE एवं YACHTING के गलत उच्चारण (क्रमशः ‘वोग्यू’ एवं ‘याचिंग’) के उदाहरण देते हुए इस बात पर जोर देना चाहा था कि अंगरेजी में वर्तनी के आधार पर पदों के उच्चारण का सही अंदाजा कभी-कभी संभव नहीं हो पाता है ।
 
योगेन्द्र जोशी
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अहितकारी हिन्दी हितैषी

उनकी मूर्खता का बखान करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है. हिन्दी का अहित करने वाले हिन्दी-हितैषी, हिन्दी को नहीं चाहिए. आपस में लड़ मरना और परायों को सर माथे बैठाना पुरानी भारतीय परम्परा रही है. दुर्भाग्य की बात है, संसद में भाषाई विवाद फिर से शुरू हो च
 
संजय बेंगाणी
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दक्षिण भारत यात्रा और हिंदी: पंचम भाग, अंग्रेजी बनाम देसी भाषाएं

समूचे देश के दर्शन कर चुकने का दावा मैं अभी नहीं कर सकता । यूं कोई भी व्यक्ति पूरे देश का भ्रमण कर भी नहीं सकता है । वस्तुतः अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले कुछएक स्थानों का दर्शन कर ले कोई तो आप कह सकते हैं कि अमुक व्यक्ति ने देश घूम लिय
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भारत की मानसिक आज़ादी : दक्षिणगामी होती हिन्दी

आज तमिलनाडु में अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल में हिन्दी पढ़ाना चाहते है. तर्क वही है जो हम अंग्रेजी की अनिवार्यता के लिए देते रहे है.
 
संजय बेंगाणी