फिर भी कविता लिख लेता हूँ...
सुबह से लेकर रात तक... भागती रहती है जिंदगी ..कभी इस खबर.. कभी उस खबर... इनके बीच मै बेखबर सा होकर घूमता रहता हूँ...बदबूदार राजनीति... नालियों में सड़ती नवजात बेटियाँ.. सेलेब्रेटियों के पाखंड..चौराहे पर एक कट चाय पीकर... फिर भी कविता लिख लेता
Jul 29 2009 02:09 PM



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