"मैं ताज हूँ "
शाहजहाँ तुम्हें याद है, या भूल चुके हो,मुझसे तुम बरसों पहले, ये कबूल चुके हो,कर बैठे प्यार मुझसे, मुमताज़ से भी बढ़ के, मुकम्मल किया जो मुझको, इंसानियत से गिरके,कब से चुप था मैं, अब सब्र नहीं है, दामन में मेरे, दो ही तो कब्र नहीं हैं, गड़े
Mar 22 2010 10:38 PM



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