"मसीहा"
सुना था, ग़म जब हद से बढ़ जायेगा,सोखने दर्द सबका, मसीहा इक आयेगा,उसके तो इंतज़ार में, कबसे है कायनात,दुनिया भी थक चुकी, होती न करामात,ये उम्मीद झूठी, ख़ुद ब ख़ुद टूटेगी एक दिन,आसमां को छोड़ ख़ुद पे नज़र, जायेगी एक दिन,जानेंगे हम ,पहल तो, करनी ही होगी तन्हा,और
Apr 22 2010 08:39 AM



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