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"छोटा बच्चा"

मन के भीतर छिपा कहीं,इक छोटा सा बच्चा है,झूठ ,कपट के बीच भी जो,अब तक थोड़ा अच्छा है,बादल में दीवारों पर, जो अब भी चेहरे ढूँढता है,आईने में बिचका कर मूंह,खुद पर आज भी हंसता है,जिसका चंचल मन अब भी,गुब्बारों पे ललचाता है,परछाईं से कभी लड़ता है,कभी उससे दौड़
 
Yogesh Sharma