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"छिनाल औरत"(आदमी भी)

ये पोस्ट चिपलूनकर जी को समर्पित है ।एक बहुत चालाक औरत थी। चरित्रहीन मां-बाप की संतान। इसलिए पैतृक गुण बचपन से ही उसमें विद्यमान थे । वह भी अपने मां-बाप से ज्यादा दुश्चरित्र हो गयी। साथ ही चालाक इतनी, कि; 'उसकी चरित्रहीनता को समझने - जानने के बाद भी उसके
 
शंकर फुलारा