"किसी काम तो आऊँ"( ग़ज़ल )
लड़खड़ाना देख के मेरा, जो तुम संभल जाओ , नहीं होगा कोई शिकवा, मुझे फिर होश खोने का वजहें लाख मिल जाती हैं, तड़पने और शिकायत की बहाना एक नहीं मिलता, भला क्यों मुस्कुराने का जो समझ सको, जीत जाना ही बस
Mar 30 2010 08:17 PM



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