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"कशमकश"

निशानी इश्क की माँगी, मिला ख़त मोहब्बत का, जो महबूबा ने, दुश्मन की किताबों में छुपाया था,हसरत मंजिलों की, उम्र भर हमने कभी ना की,ये  और बात है, रास्तों पे  बहुत प्यार आया था,ज़माने सुन लो, मुझको
 
Yogesh Sharma
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