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"एक दोस्त के लिए"

एक सुबह, मोहब्बत उजालों से  हुई एक दोपहर, धूप से हो बैठा प्यार,सितारे दिखते हैं, अब कितने  करीब,चाँद टंग जाता है, खिड़की के पार, हसीन  लगने लगी, हर चीज़  मुझे,हर शक्ल दोस्त सी, लगने है लगी, नज़र
 
Yogesh Sharma