"एक घर"
वक्त की रेत फिर इकठ्ठा करके, आँख से थोड़ी सी नमी लेके,पलों के कंकड़ों को चुन चुन के, याद के गारे में मिलाया है, लफ्ज़ की ईंटों को फिर लगाया है, मैंने शायरी का घर बनाया है, स्याह रातों को, रंगीन सुबहों को,दिल की गहराईओं में कैद
Mar 31 2010 06:58 PM



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