"अर्ज़ किया है"
जो बैठे थे चमन में हम, बड़ा संजीदा मौसम था,उठे और चल पड़े जो फिर, हवाओं के सलाम आयेमुहब्बत भी ज़माने में, बस अब सौदेबाजी है,इधर नज़राना दिल भेजा, उधर से दिल के दाम
Mar 20 2010 01:44 PM



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