"अमाँ.....कौन से शहीद"
नाम अब लगते सुने से,भगत और आज़ाद के,पढ़े कभी बचपन में थे,किस्से हमने सुभाष के,इम्तहान के पर्चों से ज्यादा,इनका न अब कुछ काम है,गांधी और नेहरु तो अब, बस रास्तों के नाम हैं,टोपी और खादी तो कब के,फैशन पुराने हो गए,आज़ादी को छुट्टी बने कितने ज़माने हो
Mar 28 2010 10:59 AM



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