शहादत....
आज बस ये दो लाइनें पढ़ लें- जा अपने ख़ून दे इल्ज़ाम तों तैनूं बरी कीता.. शहादत देन वाले दा कोई क़ातल नहीं हुंदा । कविंदर...
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शायदा
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[29 Oct 2008 14:38 PM]



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