प्‍लेटोनि‍क प्रेम ही असल प्रेम है, बाकी सड़कछाप !!

अरे बिरादर !! एक प्रसंग है- नायक अपनी प्रेमि‍का से पूछता है- क्‍या तुम मुझसे नफरत करती हो? नायि‍का कहती है- इतना प्रेम नहीं करती कि‍ तुमसे नफरत करुँ! यानी सच्‍चे दि‍ल से नफरत करनेवाला दरअसल उस चीज़ से कहीं भीतर तक जुड़ा होता है या आहत होता है पि‍छली पोस्‍ट में श्... [पूरी पोस्ट]
writer जितेन्द़ भगत
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[19 Oct 2008 06:29 AM]

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