दिल के दरमियाँ PRESENTS "कोई आवाज़ देता है"
पेटों में अन्न नहीं भूख साहस के होठ गए सूख खेतों के कोश हुए रीते जीवन की रात कहाँ बीते? माटी के पाँव फटे तरुवर के वस्त्र छीन लिए सूखे ने फ़सलों के शस्त्र हाय भूख-डायन को आज़ कौन जीते? हड्डी की ठठरी में उलझी है साँस मुट्ठी भर भूख और अंजलि भर प्यास बीत...
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डॉ० कुअँर बेचैन
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[06 Oct 2008 01:56 AM]



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