जब मैं हारी ...............एक चिड़िया से !(और मन में कहा काश मैं एक पंछी होती . )
सुबह के यही कोई छ: बजे होंगे, उदित होते सूरज की सुनहली किरणों से आकाश स्वर्णिम आभा से शोभायमान हो रहा था ,रजनीगंधा के फूलो की महक अभी हवा से पुरी तरह विलुप्त नही हुई थी ,साथ ही पारिजात ,चम्पा ,चमेली ,गुलाब के फूलो की सुगंध मद्धिम हवा में आलिप्त हो वा...
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Radhika Budhkar
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[03 Oct 2008 05:08 AM]



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