अंधेरे की परिक्रमा

वैतागवाड़ी थकान इतनी छायादार हो सकती है, उससे पहले कभी महसूस नहीं हुआ था। मैं थकान के नीचे लेट गया। आंखें बंद किए। निर्मल जी की एक पंक्ति दिमाग़ में लगातार गूंजती रही- `जीवन में असफल होने का फ़ायदा यह है कि मेरे पास अपने होने के अलावा और कुछ नहीं है, और मेरे पा... [पूरी पोस्ट]
writer Geet Chaturvedi
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[30 Sep 2008 08:11 AM]

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