जुगलबंदी : विष्णु नगर की कविता, रवीन्द्र व्यास की पेंटिंग
नागर जी की ये कविता जब पहली बार पढ़ी तो सचमुच गागर में सागर भरने वाला मुहावरा याद आ गया था। और जब रवीन्द्र की ये पेंटिंग देखी तो फ़िर नागर जी की ये कविता याद आई।रविवार शाम कुछ पुराने मित्रों के साथ नागर जी से आत्मीय मुलाकात हुई। मैंने पूछा कि आपकी कवित...
[पूरी पोस्ट]
Arun Aditya
76
5
0
5
6
[29 Sep 2008 21:20 PM]



Shuffle








