एक पल की मौत.....
रोशनदान पर टुक-टुक करती चिडि़या अपनी जगह थी, नीम के पेड़ की कत्थई होती पत्तियां भी। कैम्पस के सबसे मोटे तने वाला पेड़ अपनी जगह से ज़रा भी नहीं हिला। यहां तक कि लोहे की बैंच भी अपनी जगह पर कायम रही। फ़जल ताबिश का शेर और सिगरेट का ढेर सारा धुंआ लौट-ल...
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[24 Sep 2008 13:28 PM]



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