कलम उठाऊं तो कागज़ सुलगने लगता है....
कलम उठाऊं तो कागज़ सुलगने लगता है.... नज़र में जलता हुआ घर है, क्या किया जाए.. एक छोटी सी कहानी पढ़ी थी . कहानी कुछ यूं थी कि ‘’गिद्धों का समूह बहुत दिनों से भूखा था, खुराक का कोई इंतजाम नहीं था. एक रात सब एक जगह जमा हुए, एक मीटिंग की. एक फैसले के तहेत...
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rakhshanda
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[18 Sep 2008 05:56 AM]



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