चुप के बियाबान में आवाज़ का बूटा
टूटी पलक को यूं ही ज़मीन पर गिरने नहीं दिया जाता... रोक लिया जाता है गाल पर ही। उल्टी हथेली पर रख, आंख बंद करके एक दुआ मांगी जाती है और कभी किसी को बताया नहीं जाता कि मांगा क्या गया। लेकिन वे तो अपनी सारी दुआएं मिलकर ही मांगा करते थे, इसलिए एक दूसरे...
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शायदा
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[17 Sep 2008 07:01 AM]



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