स्मृति शेष: हिन्दी का क्रान्तिधर्मी कवि वेणु गोपाल

आज़ाद लब कागज़नगर में हम तीनों रोज़ ही शाम को मिलते. लेकिन रविवारों को हम सारा दिन साथ रहते. वेणु और तेज को एक कमरे का छोटा-सा मकान स्कूल की ओर से मिला हुआ था. वेणु मुझे रविवार को ख़ास आमंत्रित करता-- 'सुबह दस-ग्यारह बजे आ जाना'. मैं पहुंचता. मैं और वेणु गप्पो... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी

कागजनगर

views
45
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
3
[12 Sep 2008 13:22 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix