मैने पहने है कपड़े धुले

भीगी गज़ल आप भी अब मिरे गम बढ़ा दीजिए मुझको लंबी उमर की दुआ दीजिए मैने पहने है कपड़े, धुले आज फिर तोहमते अब नई कुछ लगा दीजिए रोशनी के लिए, इन अंधेरों में अब कुछ नही तो मिरा दिल जला दीजिए चाप कदमों की अपनी मैं पहचान लूं आईने से कुछ ऐसे मिला दीजिए है मुहब्बत गुन... [पूरी पोस्ट]
writer श्रद्धा जैन
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[10 Sep 2008 08:41 AM]

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