चादर, पैर और दिल्ली की डकार

वैतागवाड़ी दिल्ली एक बहुत बड़ी चादर लग रही थी, जिसमें से अनगिन पैर बाहर निकले हुए थे. चादर में न अंट पाने का दोष पैरों को देना ग़लत है. नींद में ग़ाफि़ल उन लोगों को खोजना चाहिए, जिन्होंने चादर का ऊपरी सिरा कहीं दांतों में खोंच रखा है. मैं पैदल चलता था और दिल्ली... [पूरी पोस्ट]
writer Geet Chaturvedi
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[08 Sep 2008 17:56 PM]

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