और मै रूठ पाऊँ...

मन पखेरू फ़िर उड़ चला हर रोज- -दिन निकलने के साथ- -मेरे पास होते हैं कई सवाल- -तुम्हारे लिये- -खोज-खोज कर- -सहेज लेती हूँ उन्हे- -कि तुम्हारे कुछ कहने से पहले ही- -पूछूंगी तुमसे- -उन सवालों के जवाब- -परंतु मेरे कुछ कहने से पहले ही- -तुम समझ जाते हो- -मेरी हर बात- -और बिन... [पूरी पोस्ट]
writer सुनीता शानू
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[05 Sep 2008 07:34 AM]

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