जी लो, जिंदगी एक बार फिर।

POEM OF SOUL तुम चुप क्यों हो, क्यों हो उदास तुम, कहां चली गई है हंसी तुम्हारी। पहले तो हंसती थी तुम, तुम करती थी खूब बातें, बोलती, तो चुप ना होती थी तुम। माना चांद पर दाग है तुम्हारे चेहरे पर ना था कोई दाग अब क्यों मुरझा गया है फूल ये। मेरे लिए ना सही खुश रहो खु... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj
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[03 Sep 2008 11:07 AM]

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