रिश्तों की परिभाषा

मन पखेरू फ़िर उड़ चला रिश्तों की परिभाषा चँचल मृग-नयनों में बसे, इन अश्को की भाषा समझा दो। किस-बिधि नापोगे प्यार मेरा, रिश्तों की परिभाषा समझा दो॥ कभी-कभी अनजानी सी एक डगर, पर लगती है कुछ जानी-पहचानी सी, एक पल में लगता है कोई अपना सा और हो जाती है हर बात पुरानी सी। तुम तन... [पूरी पोस्ट]
writer सुनीता शानू
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[02 Sep 2008 09:00 AM]

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