ओ... ऊपर वाले कर रहम
हर तरफ हाहाकार, चित्कार भूख से तड़पते लोग, खुद को बचाने की तड़प अपनों को बचाने की जद्दोजहद, पहले खुद को बचाएं या उनको या सुनें अपने अंतरमन को, हर तरफ है तड़प। गुम हुईं बच्चों की किलकारी उनके रोने से कांपता है दिल पर अब तो वो रोते भी नहीं सिसकियों में...
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Nitish Raj
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[31 Aug 2008 08:19 AM]



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